उत्तर प्रदेश: की राजधानी लखनऊ में बुधवार को एक हाई-प्रोफाइल मॉकड्रिल ने सभी को चौंका दिया। दृश्य ऐसा था मानो किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो—भीड़, भाषण, अचानक फायरिंग और फिर कुछ ही सेकंड में कमांडो का सुरक्षा घेरा। लेकिन यह कोई असली हमला नहीं था, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए किया गया एक सुनियोजित अभ्यास था।
यह पूरा अभ्यास राजधानी के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (IGP) में किया गया। उस समय मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर हैं—सिंगापुर के बाद वे जापान में कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। उनकी अनुपस्थिति में सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह मॉकड्रिल आयोजित की।
मॉकड्रिल की शुरुआत कालिदास मार्ग स्थित आवास से एक काल्पनिक कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री के रवाना होने के सीन से हुई। कार्यक्रम स्थल पर एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री की भूमिका में मंच पर भाषण देने के लिए खड़ा किया गया।
भीड़ में बैठे एक युवक ने अचानक खड़े होकर फायरिंग की काल्पनिक स्थिति बनाई। जैसे ही गोली चलने का संकेत मिला, वहां मौजूद एनएसजी कमांडो और सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हो गए।
हमले की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के कमांडो ने बिजली की तेजी से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कुछ ही सेकंड में मुख्यमंत्री के चारों ओर मानव ढाल बना ली।
कमांडो ने पहले हमलावर को काबू करने की कार्रवाई का अभ्यास किया, फिर मुख्यमंत्री को सुरक्षित स्थान पर निकालने की रणनीति लागू की। पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में केवल 3 मिनट का समय लगा—जो कि वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
मॉकड्रिल का अगला चरण और भी संवेदनशील था। मुख्यमंत्री के घायल होने की स्थिति दर्शाई गई। सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रेचर पर डालकर एंबुलेंस तक पहुंचाया।
ट्रैफिक पुलिस को पहले ही अलर्ट पर रखा गया था। रास्ते को कुछ ही मिनटों में खाली कराया गया। एंबुलेंस सीधे डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (लोहिया अस्पताल) की ओर रवाना हुई।
गोली चलने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन को इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। अस्पताल परिसर में तत्काल सुरक्षा बढ़ाई गई। मरीजों की आवाजाही नियंत्रित की गई और वीआईपी एंट्री पॉइंट को खाली कराया गया।
डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने आपातकालीन चिकित्सा की तैयारियों का अभ्यास किया। ऑपरेशन थिएटर, ट्रॉमा सेंटर और ICU को रेड अलर्ट पर रखा गया।
मॉकड्रिल के अगले चरण में मुख्यमंत्री की हालत नाजुक होने का सीन रचा गया। तय किया गया कि उन्हें दिल्ली के उन्नत चिकित्सा केंद्र में शिफ्ट किया जाए।
एंबुलेंस का काफिला तुरंत चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (अमौसी एयरपोर्ट) की ओर डायवर्ट किया गया। वहां से एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
दिल्ली में अंतिम गंतव्य के रूप में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ले जाने की काल्पनिक योजना को भी रिहर्सल में शामिल किया गया।
आज के दौर में वीआईपी सुरक्षा बेहद संवेदनशील विषय है। मुख्यमंत्री जैसे उच्च पद पर बैठे जनप्रतिनिधि सार्वजनिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों से मिलते हैं। ऐसे में संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए नियमित अभ्यास बेहद जरूरी हो जाता है।
इस मॉकड्रिल के जरिए निम्न बिंदुओं को परखा गया—
प्रतिक्रिया समय (Response Time)
कमांडो की समन्वय क्षमता
ट्रैफिक मैनेजमेंट
अस्पताल की आपात तैयारी
एयरलिफ्ट प्रोटोकॉल
इस अभ्यास में पुलिस, एनएसजी, खुफिया इकाई, ट्रैफिक विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एयरपोर्ट प्रशासन ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। हर एजेंसी को पूर्व निर्धारित भूमिका सौंपी गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास से संभावित खतरे की स्थिति में घबराहट कम होती है और तय समय में कार्रवाई संभव हो पाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी वीआईपी पर हमले की स्थिति में पहले 3 से 5 मिनट ‘गोल्डन टाइम’ माने जाते हैं। यदि इस दौरान सुरक्षा बल तेजी से कार्रवाई कर लें, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
लखनऊ में हुए इस अभ्यास में 3 मिनट के भीतर मुख्यमंत्री को सुरक्षित निकाल लिया गया, जो कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए संतोषजनक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री इस समय विदेश यात्रा पर हैं। सिंगापुर में निवेशकों से मुलाकात के बाद वे जापान पहुंचे हैं। ऐसे समय में राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की परख करना प्रशासनिक सतर्कता को दर्शाता है।
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में भी उनकी सुरक्षा से जुड़े सभी प्रोटोकॉल सक्रिय रहते हैं।
मॉकड्रिल के दौरान मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से देखा। कई लोगों को शुरुआत में लगा कि सचमुच हमला हो गया है। हालांकि बाद में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुरक्षा अभ्यास था।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी तरह के मॉकड्रिल आयोजित किए जा सकते हैं। खासकर उन स्थानों पर जहां बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं।
लखनऊ में आयोजित यह मॉकड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि वीआईपी सुरक्षा को लेकर प्रशासन किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहता।
3 मिनट के भीतर रेस्क्यू, अस्पताल अलर्ट और एयरलिफ्ट की पूरी प्रक्रिया ने यह दिखाया कि सुरक्षा एजेंसियां हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का अभ्यास कर रही हैं। मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
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