चलती बस बनी आग का गोला! जयपुर में 70 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान, आधे घंटे में रोडवेज बस खाक

राजधानी जयपुर: में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जब राजस्थान रोडवेज की एक चलती बस अचानक आग का गोला बन गई। बस में करीब 70 यात्री सवार थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह लपटों में घिर गई। हालांकि ड्राइवर की सूझबूझ और यात्रियों की तत्परता से सभी लोगों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली।

यह घटना जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में रीको चौराहे के पास दोपहर करीब 2:40 बजे हुई। बस सिंधी कैंप बस स्टैंड से केकड़ी के लिए रवाना हुई थी और सांगानेर की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक धुआं उठने लगा।

कैसे भड़की आग?

फायर स्टेशन मानसरोवर की फायरमैन शकुंतला सैनी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। बस के वायरिंग सिस्टम में अचानक चिंगारी उठी, जो कुछ ही सेकंड में लपटों में बदल गई। बताया जा रहा है कि आग वायरिंग से होते हुए इंजन तक पहुंच गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

बस में बैठे यात्रियों ने पहले धुआं महसूस किया। कुछ ही पलों में खिड़कियों से धुआं बाहर निकलने लगा और पीछे की तरफ से लपटें दिखने लगीं। जैसे ही ड्राइवर को स्थिति का अंदेशा हुआ, उसने तुरंत बस को सड़क किनारे रोका।

ड्राइवर की सूझबूझ से बचीं 70 जानें

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ड्राइवर ने घबराहट में कोई गलती नहीं की। उसने तुरंत बस रोकी और कंडक्टर के साथ मिलकर यात्रियों को बाहर निकलने के लिए कहा। कुछ यात्री घबराकर कूद पड़े, जबकि अन्य को व्यवस्थित तरीके से नीचे उतारा गया।

बस में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी सवार थे। स्थानीय लोगों ने भी मदद की और यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर पहुंचाया। कुछ यात्रियों का कहना था कि अगर ड्राइवर 1-2 मिनट भी देर कर देता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

देखते ही देखते कबाड़ बनी बस

यात्रियों के बाहर निकलते ही आग ने विकराल रूप ले लिया। बस के अंदर मौजूद सीटें, पर्दे और अन्य ज्वलनशील सामग्री ने आग को और भड़का दिया। कुछ ही मिनटों में पूरी बस धू-धू कर जलने लगी।

आग की सूचना मिलते ही मानसरोवर फायर स्टेशन से दो दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। तब तक बस पूरी तरह जलकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी थी।

ट्रैफिक रहा प्रभावित

आग लगने की घटना के कारण मानसरोवर रीको चौराहे के आसपास ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात को डायवर्ट किया। करीब एक घंटे बाद स्थिति सामान्य हो पाई।

किसी यात्री को नहीं आई चोट

सबसे राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी यात्री के झुलसने या घायल होने की खबर नहीं है। सभी 70 यात्री सुरक्षित हैं। हालांकि कई यात्रियों के सामान बस में ही जल गए।

एक यात्री ने बताया, “हमने पहले हल्का धुआं देखा। लगा कि शायद इंजन में दिक्कत है, लेकिन अचानक पीछे से आग की लपटें दिखीं। हम तुरंत बाहर निकले। भगवान का शुक्र है कि हम सब बच गए।”

रोडवेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

राजस्थान रोडवेज के अधिकारियों ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट को कारण माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी टीम बस के अवशेषों की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि बस की फिटनेस और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।

बढ़ते बस हादसे चिंता का विषय

पिछले कुछ वर्षों में चलती बसों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं। अक्सर इसका कारण शॉर्ट सर्किट, फ्यूल लीकेज या मेंटेनेंस में लापरवाही होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन वाहनों की नियमित तकनीकी जांच बेहद जरूरी है।

स्थानीय लोगों की बहादुरी

घटना के समय आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने भी मदद की। उन्होंने यात्रियों को पानी पिलाया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कुछ लोगों ने शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की कोशिश भी की, लेकिन लपटें बहुत तेज थीं।

CCTV फुटेज खंगाले जाएंगे

पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने का निर्णय लिया है, ताकि आग लगने के सटीक कारण का पता चल सके। फायर विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट होगा।

बड़ा हादसा टला

अगर आग बस के अंदर ही फैलती रहती और समय पर निकासी नहीं होती, तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। 70 यात्रियों की जान बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

यात्रियों के बयान

एक महिला यात्री ने बताया, “मैं अपने बच्चे के साथ थी। अचानक लोगों ने चिल्लाना शुरू किया—आग लग गई। मैं घबरा गई, लेकिन ड्राइवर ने तुरंत बस रोकी। लोगों ने हमें नीचे उतारा। सब कुछ बहुत तेजी से हुआ।”

एक बुजुर्ग यात्री ने कहा, “जीवन में पहली बार ऐसा दृश्य देखा। बस कुछ ही मिनटों में जलकर खत्म हो गई।”

सुरक्षा उपायों पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बसों की नियमित वायरिंग जांच होती है? क्या फायर एक्सटिंग्विशर सही स्थिति में थे? क्या ड्राइवर और स्टाफ को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है?

हालांकि इस मामले में ड्राइवर की तत्परता ने बड़ा हादसा टाल दिया, लेकिन सिस्टम की मजबूती पर चर्चा जरूरी है।


निष्कर्ष:

जयपुर के मानसरोवर रीको चौराहे पर हुई यह घटना भले ही बिना जनहानि के खत्म हो गई, लेकिन इसने सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने कुछ ही मिनटों में बस को राख में बदल दिया, लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ और यात्रियों की तत्परता ने 70 जिंदगियां बचा लीं।

यह घटना चेतावनी भी है और राहत भी—चेतावनी इसलिए कि मेंटेनेंस में लापरवाही जानलेवा हो सकती है, और राहत इसलिए कि समय रहते सब सुरक्षित बाहर निकल आए।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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