राजस्थान: की राजधानी जयपुर में स्थित ऐतिहासिक श्री गोविंददेवजी मंदिर में सोमवार को होली का उत्सव अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। रंग, गुलाल, फूलों और पारंपरिक संगीत के बीच राधा-गोविंद के दरबार में ऐसा दृश्य बना, मानो पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास के रंग में रंग गया हो।
मंदिर में विशेष झांकियों की सजावट की गई थी। भगवान राधा-गोविंद की सुसज्जित प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। सबसे पहले ठाकुर जी को फूलों की होली अर्पित की गई। इसके बाद राजभोग झांकी में महंत अंजन गोस्वामी ने विधि-विधान से गुलाल अर्पित कर आरती उतारी। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ जयकारे लगाए, जिससे वातावरण गूंज उठा।
होली के अवसर पर चंग की थाप और पारंपरिक फाग गायन ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया। जैसे ही चंग की ताल बजी, भक्त खुद को रोक नहीं पाए और रंगों की बौछार शुरू हो गई। मंदिर के पुजारियों ने पिचकारी से भक्तों पर पानी की फुहार छोड़ी, जिससे उत्साह चरम पर पहुंच गया। गुलाल की उड़ती हुई रंगीन परतों ने पूरे परिसर को इंद्रधनुषी रंगों से भर दिया।
फूलों की वर्षा भी इस उत्सव का विशेष आकर्षण रही। भक्तों पर गुलाब और अन्य पुष्पों की पंखुड़ियां बरसाई गईं। श्रद्धालुओं ने हाथ ऊपर उठाकर भगवान को होली की बधाई दी और एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं दीं। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे भी इस आयोजन में शामिल हुए। हर चेहरा मुस्कान और आस्था से भरा नजर आया।
होली के अवसर पर दर्शन व्यवस्था विशेष रूप से की गई थी। देवउठनी एकादशी और दीपावली की तरह भीड़ प्रबंधन लागू किया गया। सभी श्रद्धालुओं की एंट्री जलेब चौक से रखी गई, जबकि निकासी जय निवास उद्यान की ओर से की गई। दो अलग-अलग लाइनों से प्रवेश दिया गया—एक जूता-चप्पल पहनकर आने वालों के लिए रैंप से दर्शन की व्यवस्था थी, जबकि बिना जूता-चप्पल वाले श्रद्धालुओं को मंदिर छावनी में प्रवेश दिया गया।
मंदिर प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जूता-चप्पल रखने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी और निःशुल्क जूता घर बंद रहेगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई थी कि वे कीमती सामान, भारी बैग या महंगी ज्वेलरी पहनकर न आएं। साथ ही पानी की बोतल साथ रखने की सलाह दी गई थी।
स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और सांस की तकलीफ से पीड़ित लोगों से भीड़ को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई। मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त स्वयंसेवकों की तैनाती भी की।
दर्शन समय की बात करें तो ग्वाल दर्शन शाम 4:45 से 5:15 बजे तक हुए। इसके बाद अभिषेक दर्शन शाम 5:45 से 7:15 बजे तक आयोजित किए गए। संध्या आरती के पश्चात शयन झांकी रात 7:45 से 8:30 बजे तक संपन्न हुई। हर झांकी के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती रही और अनुशासन बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त रखी गई।
होली का यह उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। जयपुर का यह मंदिर हर साल होली पर विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आस्था और परंपरा का रंग कभी फीका नहीं पड़ता।
गोविंददेवजी मंदिर में मनाया गया होली उत्सव भक्ति, रंग और उत्साह का अद्भुत संगम रहा। फूलों की वर्षा, गुलाल की बौछार और चंग की थाप के बीच भक्तों ने भगवान राधा-गोविंद के साथ होली खेलकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। विशेष व्यवस्थाओं के बीच संपन्न हुआ यह आयोजन जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।
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