बागेश्वर धाम: के पीठाधीश्वर और प्रख्यात कथावाचक Dhirendra Krishna Shastri शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने दुनिया में चल रहे युद्ध और बढ़ती अशांति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में अस्थिरता और तनाव का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद भारत शांति और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ रहा है।
काशी में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि दुनिया को स्थायी शांति चाहिए तो उसे भारत की सनातन संस्कृति से सीख लेनी होगी। उनके अनुसार सनातन धर्म का मूल संदेश ही शांति, संतुलन और सह-अस्तित्व का है।
वाराणसी प्रवास के दौरान Dhirendra Krishna Shastri ने सबसे पहले प्रसिद्ध Kashi Vishwanath Temple में भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने गंगा घाटों की अलौकिक सुंदरता का आनंद लिया।
बताया जा रहा है कि उन्होंने नाव से गंगा नदी में भ्रमण करते हुए घाटों की अद्भुत छटा को निहारा। काशी के आध्यात्मिक वातावरण से वे काफी प्रभावित दिखाई दिए।
इसके बाद वे अस्सी क्षेत्र स्थित मछली बंदर मठ पहुंचे, जहां उन्होंने पीठाधीश्वर Swami Vimal Dev से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मठ परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे।
मीडिया से बातचीत के दौरान Dhirendra Krishna Shastri ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता बल्कि यह केवल विनाश और पीड़ा को जन्म देता है। अगर दुनिया को विकास की राह पर आगे बढ़ना है तो उसे शांति का रास्ता अपनाना होगा।
उनका कहना था कि भारत की सनातन संस्कृति सदियों से शांति और सहिष्णुता का संदेश देती आई है। यदि विश्व समुदाय इस विचारधारा को अपनाए तो वैश्विक स्तर पर संतुलन और शांति स्थापित की जा सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रंप जैसे नेता भरोसेमंद नहीं माने जा सकते।
उनके मुताबिक ट्रंप अक्सर अपने बयानों में बदलाव करते रहते हैं। कभी वे एक बात कहते हैं और कुछ समय बाद उससे अलग बात करते नजर आते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से दुनिया में स्थिरता नहीं बल्कि अशांति पैदा होती है। उनके अनुसार ट्रंप के टैरिफ वार से भी यह संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ाने वाली नीतियां अपनाई जा रही हैं।
वाराणसी में पत्रकारों ने जब उनसे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati से जुड़े विवादों के बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य और अन्य संत-महापुरुषों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनके अनुसार संतों और आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान करना सभी का कर्तव्य है।
अपने संबोधन में Dhirendra Krishna Shastri ने गो, गंगा और सनातन धर्म की रक्षा को सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।
उनका मानना है कि जब तक समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहेगा, तब तक देश की एकता और अखंडता मजबूत बनी रहेगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी University Grants Commission की कुछ नीतियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत एकता और अखंडता का देश है, इसलिए ऐसी नीतियां नहीं बननी चाहिए जिनसे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो।
उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि उसमें दीवारें खड़ी करना।
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