राजस्थान: की राजनीति में बड़ा बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है। राज्य में आगामी परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है। राजस्थान विधानसभा के स्पीकर Vasudev Devnani ने दावा किया है कि जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के तहत राज्य में लगभग 70 नई विधानसभा सीटें बढ़ सकती हैं।
अगर ऐसा होता है तो वर्तमान में मौजूद 200 विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर करीब 270 तक पहुंच सकती है। इसी संभावित बदलाव को ध्यान में रखते हुए विधानसभा में भविष्य की जरूरतों के अनुसार नए हॉल और बैठने की व्यवस्था की योजना भी बनाई जा रही है।
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बताया कि फिलहाल राजस्थान विधानसभा में 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है, लेकिन परिसीमन के बाद विधायकों की संख्या बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए विधानसभा में 280 विधायकों के बैठने की क्षमता वाला नया हॉल तैयार किया जाएगा। इसका स्ट्रक्चर पहले से तैयार किया जा चुका है।
देवनानी ने यह भी कहा कि वर्तमान में विधानसभा भवन में कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें युवा संसद, छात्र संसद और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग आते हैं, इसलिए आधुनिक सुविधाओं के साथ नया हॉल तैयार करना जरूरी हो गया है।
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने यह बयान जयपुर के Constitution Club Jaipur में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम उनकी पुस्तक के विमोचन और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में दो साल के कार्यकाल के अवसर पर आयोजित किया गया था।
देवनानी के इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में परिसीमन और विधानसभा सीटों में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजस्थान विधानसभा में संसद की तर्ज पर सेंट्रल हॉल बनाने की भी योजना है। इस परियोजना के लिए मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने 14 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है।
इस सेंट्रल हॉल में सभी राजनीतिक दलों के विधायक बैठकर चर्चा कर सकेंगे। यहां चाय, नाश्ता और भोजन की भी व्यवस्था होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का सेंट्रल हॉल विधायकों के बीच संवाद और समन्वय को बढ़ावा देगा।
विधानसभा में फिलहाल 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है। लेकिन यदि परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ती है तो मौजूदा सदन छोटा पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विधानसभा परिसर में पहले से मौजूद उस हॉल को तैयार करने की योजना है, जिसे मूल रूप से विधान परिषद के लिए बनाया गया था। जरूरत पड़ने पर इसे नए सदन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
राजस्थान में विधानसभा सीटों की संख्या में आखिरी बार बदलाव 1977 में हुआ था। उस समय सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई थी।
इससे पहले 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में राज्य में 160 सीटें थीं। 1957 में यह संख्या बढ़कर 167 हो गई। इसके बाद 1967 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 184 कर दी गई।
1977 में एक बार फिर परिसीमन हुआ और विधानसभा सीटों की संख्या 200 कर दी गई। तब से लेकर अब तक सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अगर परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ती है तो इससे राजस्थान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नई सीटें बनने से कई नए नेताओं को राजनीति में मौका मिलेगा। वहीं कई पुराने विधानसभा क्षेत्रों का स्वरूप बदल सकता है।
इसके अलावा परिसीमन के दौरान कई सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। इससे कई मौजूदा नेताओं के निर्वाचन क्षेत्र भी बदल सकते हैं।
परिसीमन की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों की संख्या तय की जाती है।
राजस्थान में संभावित परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने से राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। नई सीटों के बनने से जहां नए नेताओं को मौका मिलेगा, वहीं कई पुराने राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला परिसीमन आयोग की रिपोर्ट और आगामी जनगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
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