जयपुर. राजस्थान में सियासत की नई बिसात बिछने लग गई है. इसकी वजह है राज्यसभा चुनाव. आगामी 21 जून को राजस्थान के तीन राज्यसभा सांसद रिटायर हो जाएंगे. लिहाजा तीन सीटें खाली हो जाएंगी. इन तीनों सीटों पर काबिज होने के लिए सत्तारूढ़ बीजेपी ने रणनीति तैयार कर ली है. पार्टी के विधानसभा सदस्यों की संख्या को देखते हुए बीजेपी के खाते में दो सीटें फिर से आना तय माना जा रहा है, लेकिन उसकी कोशिश तीनों सीटों पर काबिज होने की है. तीसरी सीट को भाजपा ‘अंतरात्मा की आवाज’ के जरिए जीतने का ख्वाब देख रही है. इसके लिए बीजेपी तीनों सीटों के लिए नामों का पैनल तैयार कर रही है.
राजस्थान से खाली हो रही राज्यसभा की तीन सीटों पर फिलहाल भाजपा सांसद राजेंद्र गहलोत, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी काबिज हैं. इनका कार्यकाल 21 जून को पूरा होने जा रहा है. राज्यसभा में राजस्थान की कुल 10 सीटें हैं. राजस्थान विधानसभा के कुल सदस्यों में भाजपा और कांग्रेस के पास जो संख्या है उससे पुरानी स्थिति ही वापस बनने की संभावना है. यानी समीकरणों के अनुसार भाजपा के पास दो और कांग्रेस के पास एक सीट जीतने लायक संख्या मौजूद है.
राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए प्रथम वरीयता के 51 वोटों की आवश्यकता होगी. भाजपा के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या में वोट हैं. उसे दो सीटों के लिए प्रथम वरीयता वाले 102 वोट चाहिए. 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में वर्तमान में बीजेपी के पास 118 और कांग्रेस के पास 67 सीटें हैं.
कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त वोट संख्या मौजूद है और उसे एक सीट के लिए 51 वोट चाहिए. इसके बावजूद भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीद बनाए हुए है. पार्टी को संभावना है कि अगर चुनाव में विपक्ष की अंदरूनी खींचतान और असंतोष असर दिखाता है तो ‘अंतरात्मा की आवाज’ के सहारे तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज की जा सकती है. भाजपा इसी संभावना पर अपनी रणनीति तैयार कर रही है.
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