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राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी रविवार को बांसवाड़ा दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने शिक्षा, इतिहास और भारतीय संस्कृति को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने कहा कि बचपन से वे ‘अकबर महान’ पढ़ते रहे, लेकिन इससे उनके मन में पीड़ा होती थी कि जिस आक्रांता ने भारत पर आक्रमण किया, उसे महान क्यों कहा जाए। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए ‘अकबर महान’ के स्थान पर ‘प्रताप महान’ को शामिल कराया।
देवनानी ने भारतीय इतिहास और संस्कृति पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि लंबे समय तक विदेशी शासकों और अंग्रेजों ने भारतीयों को उनकी जड़ों से दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अब तक यह पढ़ाया जाता रहा कि भारत की खोज वास्कोडिगामा ने की, जबकि भारत हजारों वर्षों पुरानी सनातन संस्कृति वाला देश है। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को दिशा दी है और “हमने विश्व को खोजा है, हमें किसी ने नहीं खोजा।”
इस दौरान वे गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ का शुभारंभ किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति केशव ठाकुर ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में गढ़ी विधायक कैलाश मीणा, पूर्व कुलपति एवं संरक्षक कैलाश सोडाणी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
मीडिया से बातचीत में देवनानी ने बांसवाड़ा के विकास कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार वर्ष 1970-71 में बांसवाड़ा आए थे, तब यहां की सड़कें, बस स्टैंड और अन्य व्यवस्थाएं अलग थीं, लेकिन आज क्षेत्र में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों के साथ-साथ वर्तमान सरकार भी बांसवाड़ा के विकास को प्राथमिकता दे रही है।
कार्यक्रम के बाद उनका प्रसिद्ध शक्तिपीठ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन-पूजन का कार्यक्रम तय हुआ। वीआईपी दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा और विश्वविद्यालय परिसर से लेकर मंदिर तक सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए।
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