राजस्थान सहित पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार को देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की घोषणा की। नई दरों के अनुसार पेट्रोल में प्रति लीटर 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए की वृद्धि की गई है। पिछले 11 दिनों में यह चौथी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।
इन लगातार बढ़ोतरी के कारण आम लोगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल लगभग 7.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पेट्रोल की कीमत 112.66 रुपए प्रति लीटर और डीजल 97.78 रुपए प्रति लीटर तक पहुंचने की चर्चा हो रही है, जिससे वाहन चालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
तेल कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की लागत, आयात खर्च और पहले हुए घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में क्रमिक बढ़ोतरी की जा रही है। दूसरी ओर आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की ऊंची कीमतों के पीछे केवल कच्चे तेल की कीमतें ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि उस पर लगने वाले विभिन्न टैक्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य करों की दरें अलग होने के कारण ईंधन की कीमतों में भी अंतर देखने को मिलता है। राजस्थान जैसे राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक कर दरों के कारण कीमतें अन्य स्थानों की तुलना में ज्यादा दिखाई देती हैं।
ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं और आवश्यक सेवाओं की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आम नागरिकों को महंगाई के दोहरे दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
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