जैसलमेर जिले के पोकरण से इंसानियत और बेजुबान के प्यार की एक अनोखी और मर्मस्पर्शी कहानी सामने आई है। नाचना क्षेत्र के सातर फांटा स्थित चक 8 एनएलडी में रहने वाले चौहान परिवार ने 9 महीने पहले जंगली कुत्तों के हमले से बचाकर एक हिरण के बच्चे को अपने घर लाया था। परिवार ने इसे अपने बच्चों की तरह पाला और घर में लालन-पालन किया।
शुक्रवार शाम, हिरण को वन विभाग को सौंपते समय परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं। सबसे भावुक पल तब आया जब हिरणी की आंख में पट्टी बांधकर उसे गाड़ी में बिठाया गया ताकि वह घर का रास्ता न देख सके। वन विभाग की टीम भी परिवार की भावनाओं को देख कर प्रभावित हुई और उनके भी आंखों से आंसू छलक पड़े।
हिरणी के 9 महीने के घर में रहने के दौरान परिवार ने उसका पूरा ख्याल रखा और उसकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। हिरणी स्वस्थ होकर चलने लगी थी, इसलिए परिवार ने वन्यजीव प्रेमी धर्मेंद्र पुनिया और वन विभाग को सूचित किया। टीम के पहुंचने पर हिरणी को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया।
यह कहानी इंसानियत, करुणा और जंगली जानवरों के प्रति सच्चे प्रेम का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। चौहान परिवार ने दिखाया कि प्यार और देखभाल से किसी भी जंगली प्राणी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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