राजस्थान में लंबे समय से अटके पड़े पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) के चुनावों को लेकर प्रदेश की जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में उत्सुकता बढ़ी हुई है। इस बड़े चुनावी सस्पेंस के बीच राज्य सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) तथा स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया के समक्ष कहा कि राज्य सरकार ने चुनाव संचालन के लिए सभी कानूनी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वार्डों का परिसीमन और पुनर्सीमांकन, सीमाओं का पुनर्निर्धारण और अन्य विधिक औपचारिकताएं सरकार द्वारा समय रहते पूरी कर दी गई हैं। अब चुनाव की तारीखों का निर्णय और मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग के विवेक और संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में है।
खर्रा ने यह भी कहा कि सरकार आयोग को हर प्रकार का प्रशासनिक सहयोग प्रदान करेगी। चाहे संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था का मामला हो, चुनावी खर्च के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन हो या मतदान दल तैयार करने के लिए प्रशासनिक कर्मचारियों का सहयोग हो, सरकार हर मोर्चे पर तैयार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आयोग कल ही चुनाव की घोषणा और मतदान करवा दे, तो सरकार पूरी तरह तैयार है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में लंबित स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव 31 जुलाई तक संपन्न कराने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद सचिवालय और निर्वाचन आयोग के दफ्तरों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। आयोग के स्तर पर मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन और आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होना शेष है।
मंत्री खर्रा के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार स्थानीय निकाय चुनावों को टालने के पक्ष में नहीं है और चुनाव संपन्न कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। राज्य के प्रशासनिक तंत्र ने चुनावी तैयारियों को समय रहते पूरा कर लिया है और अब निर्णय पूरी तरह आयोग के हाथ में है।
यह बयान न्यायिक निर्देशों, संवैधानिक प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारियों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और प्रदेश की जनता इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रही है कि चुनाव की वास्तविक तारीखें कब घोषित होंगी।
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