राजस्थान के कोटा में बिजली व्यवस्था लगातार खराब चल रही है। शहर में बार-बार बिजली ट्रिपिंग हो रही है और फॉल्ट सुधारने में घंटों लग रहे हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान भी समय पर नहीं हो पा रहा। इस पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर का गुस्सा खुलकर सामने आया।
मंत्री नागर ने कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिक्ट लिमिटेड (KEDL) के सीईओ मनीष अरोड़ा और टेक्निकल हेड वेंकटेशन कोड़ी सहित अन्य शीर्ष अधिकारियों को अपने आवास पर तलब किया और बिजली व्यवस्था की खराबी पर कड़ी फटकार लगाई। मंत्री ने कहा कि कोटा शहर में बिजली की हालत लगातार खराब है, जनता परेशान है और शिकायतें दर्ज करवा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर अगले दो महीनों में हालात सुधार नहीं हुए, तो सरकार को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।
ऊर्जा मंत्री ने KEDL के प्रशासनिक ढांचे को भी निशाने पर लिया और कहा कि कंपनी के अधिकारी जनता से दूरी बनाए रखते हैं और उपभोक्ताओं की समस्याओं की सुनवाई नहीं करते। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए जाएं और कंपनी का ढांचा जयपुर डिस्कॉम की तरह जवाबदेह बनाया जाए।
फॉल्ट सुधारने वाली टीम (FRT) में कर्मचारियों और संसाधनों की भारी कमी बताई गई। मंत्री ने आधुनिक उपकरण और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ग्रामीण इलाकों में बिजली प्रबंधन शहर से बेहतर बताया गया, जबकि शहर में मामूली फॉल्ट पर भी घंटों ब्लैकआउट होता है।
मंत्री ने 250 करोड़ की अंडरग्राउंड लाइन परियोजना पर सवाल उठाए और कहा कि अब समय आ गया है कि KEDL पुरानी कार्यप्रणाली छोड़कर एआई आधारित और आधुनिक तकनीकों को अपनाए। उन्होंने भ्रष्टाचार और संभावित अनियमितताओं की जांच के लिए ट्रिपिंग, फॉल्ट, शटडाउन और जले ट्रांसफार्मरों की रोजाना रिपोर्ट सरकार को भेजने का आदेश भी दिया।
यह पहली बार है जब ऊर्जा मंत्री ने कोटा की बिजली व्यवस्था पर इतने सख्त तेवर दिखाए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि KEDL अगले दो महीनों में स्थिति सुधार पाएगा या नहीं।
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