राजस्थान: में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी चल रही है। आगामी जनगणना को ध्यान में रखते हुए करीब 1.60 लाख सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर एक साल तक रोक लगाई जा सकती है। यह कदम जनगणना प्रक्रिया को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए उठाया जा रहा है।
राज्य की राजधानी जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार, Census of India के तहत 1 मई से जनगणना का पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इसी के मद्देनजर जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
जनगणना देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में से एक मानी जाती है, जिसमें लाखों कर्मचारियों की भागीदारी होती है। ऐसे में यदि बीच में कर्मचारियों के तबादले होते हैं, तो पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को निरंतर निभाएं।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर सरकार विचार कर रही है और जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी हो सकते हैं।
इस बार जनगणना में डिजिटल तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। 1 मई से 15 मई के बीच आम नागरिक खुद “सेल्फ सेंसस” के जरिए अपना डेटा ऑनलाइन भर सकेंगे।
इसके लिए एक विशेष पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा, जहां लोगों को मकान लिस्टिंग से जुड़े 33 सवालों के जवाब देने होंगे। यह प्रक्रिया मोबाइल या कंप्यूटर दोनों के माध्यम से पूरी की जा सकेगी।
सेल्फ सेंसस प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा, जिस पर OTP भेजा जाएगा। इस OTP के माध्यम से लॉगिन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होगी।
जनगणना निदेशक ने साफ किया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी नागरिक से OTP नहीं मांगेगा। अगर कोई फोन या मैसेज के जरिए OTP मांगता है, तो वह धोखाधड़ी हो सकती है। लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
15 मई तक सेल्फ सेंसस का काम पूरा होने के बाद 16 मई से 14 जून के बीच प्रगणक (जनगणना कर्मचारी) घर-घर जाकर मकान लिस्टिंग का कार्य करेंगे।
इस दौरान वे मकानों की स्थिति, परिवार के सदस्यों, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। जनगणना के पहले चरण में मुख्य रूप से मकानों और परिवारों की पहचान कर सूची तैयार की जाएगी।
जनगणना प्रक्रिया में हर प्रकार के भवन को शामिल किया जाएगा—चाहे वह आवासीय मकान हो, कार्यालय, दुकान या कोई अन्य प्रतिष्ठान।
यदि किसी घर पर प्रगणक के जाने के समय वह बंद मिलता है, तो कर्मचारी 30 दिनों के भीतर दोबारा वहां पहुंचकर जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान यह भी दर्ज किया जाएगा कि मकान में कोई रहता है या वह खाली पड़ा है।
प्रत्येक हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में लगभग 850 मकानों को शामिल किया जाएगा। इससे डेटा संग्रहण को व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
राजस्थान में शुरू होने जा रही जनगणना 2026 न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी। ट्रांसफर पर संभावित रोक से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। डिजिटल सेल्फ सेंसस की सुविधा इसे और आधुनिक और आसान बना रही है, लेकिन साथ ही नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से भी सतर्क रहना होगा।
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