8 साल बाद बार काउंसिल चुनाव में बड़ा मुकाबला: 84 हजार वकील तय करेंगे किसकी बनेगी ‘कानूनी सत्ता’, पहली बार महिलाओं को आरक्षण

राजस्थान: में वकीलों की सबसे बड़ी संस्था बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के चुनाव आखिरकार 8 साल बाद होने जा रहे हैं। करीब तीन साल की देरी के बाद आयोजित हो रहे इस चुनाव को लेकर प्रदेशभर के अधिवक्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बुधवार को होने वाले इस मतदान में कुल 84,247 वकील अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और 23 पदों के लिए 234 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे।

यह चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है। पहली बार महिला अधिवक्ताओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस बार कुल 57 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं, जो इस चुनाव को और भी रोचक बना रही हैं।

बार काउंसिल की कुल 25 सदस्यीय संरचना में से 23 सदस्य चुनाव के जरिए चुने जाएंगे, जबकि 2 महिला सदस्यों को सह-नामित किया जाएगा। इस तरह पहली बार काउंसिल में 7 महिला सदस्य शामिल होंगी। यह कदम वकालत के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

चुनाव की निगरानी इस बार सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के अधीन की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। इसके बाद सभी मतपेटियों को संबंधित जिला न्यायाधीशों के पास सुरक्षित रखा जाएगा और अगले दिन पुलिस सुरक्षा में जोधपुर भेजा जाएगा। मतगणना 29 अप्रैल से शुरू होगी।

राज्यभर में मतदान के लिए कुल 258 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा बूथ राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर में बनाया गया है, जहां 14,781 अधिवक्ता मतदाता पंजीकृत हैं। यहां एक साथ 200 वकीलों के मतदान के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

जयपुर जिले में सबसे अधिक 22,000 से ज्यादा मतदाता हैं, जिसके चलते यहां हाईकोर्ट के अलावा सेशन कोर्ट, फैमिली कोर्ट, आमेर और सांगानेर कोर्ट में भी मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। मतदान केंद्रों पर मोबाइल, कैमरा या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को ले जाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही मतदान केंद्र के 200 गज के दायरे में किसी भी प्रकार के प्रचार-प्रसार पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

निर्वाचन आचार संहिता के तहत मतदान शुरू होने से 36 घंटे पहले ही प्रचार बंद कर दिया गया था। किसी भी प्रत्याशी या उनके समर्थकों को वोटरों को प्रभावित करने, पर्चे बांटने या नारे लगाने की अनुमति नहीं होगी।

यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले चुनाव 2018 में हुए थे और इसके बाद से लगातार किसी न किसी कारण से चुनाव टलते रहे। अब जब यह चुनाव हो रहे हैं, तो इसे वकीलों के लिए अपनी आवाज और प्रतिनिधित्व तय करने का महत्वपूर्ण मौका माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार महिला आरक्षण के कारण चुनावी मुकाबला और कड़ा हो गया है। कई नए चेहरे भी मैदान में हैं, जो पारंपरिक नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वकालत के क्षेत्र में नए बदलाव और दिशा तय करने वाला भी साबित हो सकता है।


निष्कर्ष:

बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के ये चुनाव न केवल लंबे इंतजार के बाद हो रहे हैं, बल्कि इनमें कई नए बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। खासकर महिला आरक्षण ने इस चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है। अब देखना होगा कि वकील समुदाय किसे अपनी ‘कानूनी आवाज’ के रूप में चुनता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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