दौसा में नगर परिषद पर सख्त एक्शन! जवाब न देने पर कमिश्नर तलब, हर केस में लगा जुर्माना

राजस्थान: के दौसा जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां स्थाई लोक अदालत ने नगर परिषद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए आयुक्त (कमिश्नर) को तलब कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब अदालत के बार-बार आदेश देने के बावजूद नगर परिषद की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।

स्थाई लोक अदालत में लंबित प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के दौरान यह मामला सामने आया। अदालत की पीठ, जिसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष राजेश चंद्र गुप्ता और सदस्य अशोक कुमार शर्मा व सुरेश कुमार गोयल शामिल थे, ने प्रार्थियों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया। प्रार्थी गोविंद सहाय, कुनती देवी और रामदयाल ने जन उपयोगी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर नगर परिषद के खिलाफ परिवाद दायर किए थे।

अदालत ने पाया कि नगर परिषद को कई बार नोटिस भेजे गए और जवाब देने के लिए पर्याप्त अवसर भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कड़ा कदम उठाया। प्रत्येक मामले में 500 रुपये का हर्जाना (कॉस्ट) लगाते हुए नगर परिषद को अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया गया है।

इसके साथ ही अदालत ने नगर परिषद के आयुक्त कमलेश कुमार मीना को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। यह निर्देश इस बात को दर्शाता है कि अदालत इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करना चाहती है। अगर अगली पेशी तक भी जवाब नहीं दिया गया, तो और सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

इस पूरे मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका भी अहम रही है। प्रार्थियों ने इसी प्राधिकरण के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करवाई थीं। उनका कहना है कि नगर परिषद द्वारा मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

परिवादी पक्ष की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अधिवक्ता जितेंद्र मुद्गल ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने नगर परिषद की लापरवाही और जनता की समस्याओं को विस्तार से रखा। अदालत ने इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की।

यह मामला न सिर्फ दौसा बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश है कि प्रशासनिक संस्थाएं अगर अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करती हैं, तो न्यायपालिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। लोक अदालत जैसे मंच आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए बनाए गए हैं, और यहां इस तरह की सख्ती यह दर्शाती है कि कानून के सामने सभी समान हैं।

स्थानीय लोगों में इस फैसले के बाद संतोष की भावना देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से नगर परिषद की उदासीनता के कारण समस्याएं बढ़ती जा रही थीं, लेकिन अब अदालत के हस्तक्षेप से उम्मीद जगी है कि जल्द समाधान होगा।

अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि नगर परिषद अदालत के आदेशों का पालन करती है या फिर उसे और कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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