भारत बना रहा ‘खामोश किलर’ मिसाइल! रफ्तार ऐसी कि दुश्मन संभलने से पहले होगा वार

भारत: अपने रक्षा क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, और अब एक ऐसी तकनीक सामने आई है जो दुश्मनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित की जा रही लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल अब उन्नत चरण में पहुंच चुकी है। इस मिसाइल की खासियत इसकी जबरदस्त गति, सटीकता और रडार से बचने की क्षमता है।

DRDO के प्रमुख Samir V Kamat ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में जानकारी दी कि इस मिसाइल के शुरुआती परीक्षण जल्द शुरू हो सकते हैं। यह भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है LR-AShM मिसाइल की खासियत?

LR-AShM एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जिसे खासतौर पर भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल स्थिर (static) और गतिशील (moving) दोनों प्रकार के लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी गति है। यह मिसाइल अधिकतम Mach 10 (ध्वनि की गति से 10 गुना) यानी करीब 12,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती है। आम तौर पर यह Mach 5 की औसत गति से उड़ान भरते हुए कई बार दिशा बदलती है, जिससे इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

रडार से बचने की क्षमता

पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, यह मिसाइल सीधी रेखा में नहीं चलती। यह “क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी” का पालन करती है, यानी रास्ते में कई बार दिशा बदलती है। इसकी यही खासियत दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में मदद करती है।

कम ऊंचाई पर उड़ान और हाई-स्पीड मैन्युवरिंग के कारण इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हो जाता है। अंतिम चरण में यह अपने उन्नत सेंसर की मदद से मूविंग टारगेट को भी सटीकता से हिट कर सकती है।

दो-स्टेज रॉकेट सिस्टम

इस मिसाइल में दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। पहला चरण मिसाइल को ऊंचाई और गति देता है, जबकि दूसरा चरण इसे हाइपरसोनिक स्पीड तक पहुंचाता है। इसके बाद मिसाइल बिना इंजन के ग्लाइड फेज में प्रवेश करती है और लक्ष्य की ओर बढ़ती है।

ग्लाइड और क्रूज मिसाइल में अंतर

हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में मुख्य अंतर उनके इंजन और उड़ान प्रणाली में होता है। ग्लाइड मिसाइल बूस्टर से गति हासिल करने के बाद बिना इंजन के उड़ती है, जबकि क्रूज मिसाइल स्क्रैमजेट इंजन के जरिए लगातार ऊर्जा प्राप्त करती रहती है।

भारत ने दोनों तकनीकों पर काम किया है, लेकिन फिलहाल ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम ज्यादा आगे है।

भारत की बढ़ती मिसाइल ताकत

भारत अब एक व्यापक “कन्वेंशनल मिसाइल फोर्स” तैयार करने पर काम कर रहा है, जिसमें शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग रेंज मिसाइलों के साथ-साथ क्रूज और हाइपरसोनिक हथियार शामिल होंगे। इससे देश की स्ट्राइक क्षमता और भी मजबूत होगी।

इस दिशा में ‘प्रलय’ जैसी शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल भी अंतिम परीक्षण चरण में है। इसके अलावा भारत ने 2024 में ओडिशा के तट से हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी तकनीकी क्षमता साबित की थी।

रक्षा मंत्री का बयान

भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो चुका है, जिनके पास हाइपरसोनिक तकनीक मौजूद है।


निष्कर्ष:

भारत की LR-AShM हाइपरसोनिक मिसाइल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भविष्य की युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा है। इसकी गति, सटीकता और रडार से बचने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है। आने वाले समय में इसके सफल परीक्षण भारत की रक्षा ताकत को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं। 

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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