राजस्थान: के युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खोलने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी जयपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि अब प्रदेश के युवाओं को जर्मन, जापानी, फ्रेंच, रूसी और कोरियन जैसी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
यह घोषणा बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित ‘विदेशी भाषा और संचार कौशल’ कार्यक्रम के दौरान की गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में विदेशी भाषाओं का ज्ञान अब एक अतिरिक्त योग्यता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य कौशल बन गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए राजस्थान के युवाओं को दुनिया भर में काम करने के अवसर मिलेंगे और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खुद को बेहतर तरीके से स्थापित कर पाएंगे।
इस योजना को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने English and Foreign Languages University और National Skill Development Corporation के साथ समझौता (MoU) किया है। इस समझौते के तहत युवाओं को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे विदेशी भाषाओं में दक्षता हासिल कर सकें।
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम देश की स्किल डेवलपमेंट क्षमता को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी भाषा सीखने के साथ-साथ युवाओं को अपनी स्थानीय भाषा और संस्कृति से जुड़े रहना भी जरूरी है।
वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने भी इस पहल को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वैश्विक स्तर पर काम करने के लिए भाषा कौशल बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन इसके साथ ही हमें अपनी मातृभाषा और स्थानीय पहचान को भी बनाए रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में जापान और कोरिया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर मौजूद हैं। यदि युवा इन देशों की भाषा सीख लेते हैं, तो उनके लिए वहां नौकरी पाना आसान हो सकता है। इसके अलावा, राजस्थान में तेजी से बढ़ते पर्यटन उद्योग को देखते हुए भी विदेशी भाषा का ज्ञान युवाओं के लिए फायदेमंद साबित होगा।
इस कार्यक्रम के दौरान एक विदेशी एजुकेशन कंपनी के साथ भी समझौता किया गया। कंपनी के फाउंडर और सीईओ करुण कंदोई ने बताया कि इस योजना के तहत जिला स्तर पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे और ग्राम पंचायत स्तर तक युवाओं को मार्गदर्शन दिया जाएगा। इससे युवाओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस देश के लिए कौन-सी भाषा उपयुक्त है और वहां जाने के लिए क्या-क्या चुनौतियां हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर भी देगी। इससे राजस्थान के युवा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और संगठनों में काम करने के लिए तैयार हो सकेंगे।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को राज्य के युवाओं के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
राजस्थान सरकार की यह पहल युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विदेशी भाषाओं का ज्ञान न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने में भी मदद करेगा।
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