Medical Tourism में दुनिया का नया हब बनेगा भारत! 2030 तक 16 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान, जानिए क्यों बढ़ रही विदेशियों की भीड़

मेडिकल टूरिज्म का ग्लोबल हब बन रहा भारत, 2030 तक 16 अरब डॉलर पहुंच सकता है बाजार

नई दिल्ली: भारत तेजी से दुनिया के सबसे बड़े मेडिकल टूरिज्म केंद्रों में शामिल होता जा रहा है। सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और आयुष जैसी पारंपरिक उपचार प्रणालियों के कारण विदेशों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भारत पहुंच रहे हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार वर्ष 2025 में करीब 8.7 बिलियन डॉलर का आंका गया है, जो 2030 तक लगभग दोगुना होकर 16.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

सरकार ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के लिए तेजी से एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत एशिया ही नहीं बल्कि दुनिया के बड़े हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में उभर सकता है।

क्यों बढ़ रहा है भारत का मेडिकल टूरिज्म?

दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और कई देशों में लंबे वेटिंग पीरियड के कारण मरीज अब इलाज के लिए दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं। भारत में कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, यही वजह है कि विदेशी मरीज तेजी से यहां आ रहे हैं।

सरकारी बयान के मुताबिक, भारत में मेडिकल टूरिज्म के बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं:

  • आधुनिक और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं
  • कम लागत में इलाज
  • अनुभवी डॉक्टर और विशेषज्ञ
  • आयुर्वेद, योग और आयुष आधारित उपचार
  • डिजिटल हेल्थ सर्विसेज
  • आयुष वीजा जैसी नई सरकारी पहल

सरकार का कहना है कि भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली और आधुनिक हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का अनोखा मेल मेडिकल टूरिज्म को नई ऊंचाई दे रहा है।

आयुष वीजा बना बड़ा गेमचेंजर

भारत सरकार ने विदेशी मरीजों को आकर्षित करने के लिए “आयुष वीजा” जैसी विशेष सुविधाएं शुरू की हैं। इसके जरिए विदेशी नागरिक भारत आकर आयुर्वेद, योग, पंचकर्म और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ उठा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड महामारी के बाद दुनिया भर में लोग प्राकृतिक और वेलनेस आधारित उपचारों की ओर ज्यादा आकर्षित हुए हैं। इसी वजह से भारत के आयुष सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है।

मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म दोनों में बढ़त

भारत का मेडिकल वैल्यू ट्रैवल इकोसिस्टम केवल सर्जरी और अस्पताल आधारित इलाज तक सीमित नहीं है। इसमें वेलनेस टूरिज्म भी शामिल है, जहां विदेशी पर्यटक योग, ध्यान, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के लिए भारत आते हैं।

सरकार के मुताबिक, यह दोहरी व्यवस्था भारत को दूसरे देशों से अलग बनाती है। जहां एक ओर मरीज जटिल सर्जरी और आधुनिक इलाज के लिए आते हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों लोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधार के लिए आयुष सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

2025 में कितने विदेशी मरीज आए?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में कुल 91.5 करोड़ विदेशी पर्यटक आए। इनमें से लगभग 5,07,244 लोग चिकित्सा उपचार के उद्देश्य से भारत पहुंचे।

यानी कुल विदेशी पर्यटकों में मेडिकल टूरिज्म की हिस्सेदारी लगभग 5.5 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।

किन देशों से सबसे ज्यादा लोग इलाज के लिए आए?

भारत आने वाले चिकित्सा पर्यटकों में सबसे ज्यादा संख्या बांग्लादेश से रही। आंकड़ों के अनुसार:

  • बांग्लादेश – 3,25,127
  • इराक – 30,989
  • उज्बेकिस्तान – 13,699
  • सोमालिया – 11,506
  • तुर्कमेनिस्तान – 10,231
  • ओमान – 9,738
  • केन्या – 9,357

इन देशों के मरीज खासतौर पर हार्ट सर्जरी, ऑर्थोपेडिक उपचार, कैंसर थेरेपी, किडनी ट्रांसप्लांट और आयुर्वेदिक उपचार के लिए भारत आ रहे हैं।

वैश्विक बाजार में भी तेजी

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक मेडिकल वैल्यू ट्रैवल बाजार 2022 में करीब 115.6 बिलियन डॉलर का था। अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 286.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत इस वैश्विक वृद्धि का सबसे बड़ा लाभार्थी बन सकता है क्योंकि यहां लागत कम होने के साथ-साथ मेडिकल विशेषज्ञता भी लगातार मजबूत हो रही है।

स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा बड़ा आर्थिक फायदा

मेडिकल टूरिज्म बढ़ने से भारत को आर्थिक रूप से भी बड़ा फायदा हो रहा है। इससे अस्पताल, होटल, ट्रैवल, फार्मा और वेलनेस इंडस्ट्री को मजबूती मिल रही है। इसके साथ ही लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।


निष्कर्ष:

भारत तेजी से मेडिकल टूरिज्म की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आयुष आधारित उपचारों के कारण विदेशी मरीजों का भरोसा भारत पर बढ़ रहा है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो 2030 तक भारत मेडिकल टूरिज्म के सबसे बड़े वैश्विक केंद्रों में शामिल हो सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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