जयपुर: राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बैठाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया कि कुछ लोग लाखों रुपए लेकर दूसरों की जगह परीक्षा दे रहे थे। इनमें एक सरकारी शिक्षक और एक रिटायर्ड सैनिक भी शामिल हैं। SOG की पूछताछ में आरोपियों ने लाखों रुपए के सौदों की बात कबूल की है।
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों के जरिए अवैध तरीके से चयन कराने के मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है।
तीन अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें डमी कैंडिडेट और मूल अभ्यर्थी दोनों शामिल हैं।
पहला मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा अक्टूबर 2022 में आयोजित प्राध्यापक हिन्दी (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ा है।
जांच में पता चला कि जालौर निवासी मनोहर लाल, जो वर्तमान में सरकारी स्कूल में सेकेंड ग्रेड टीचर के पद पर कार्यरत है, उसने डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा दी थी।
मनोहर लाल ने मूल अभ्यर्थी देराम की जगह परीक्षा दी और उसे पास भी करा दिया।
SOG की पूछताछ में सामने आया कि देराम पढ़ाई में कमजोर था, इसलिए उसने अपनी जगह परीक्षा दिलाने के लिए मनोहर लाल से संपर्क किया। दोनों के बीच करीब 5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था।
जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों ने परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड में फोटो बदलकर छेड़छाड़ की थी।
दोनों की पहचान जोधपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान हुई थी। फिलहाल SOG फरार मूल अभ्यर्थी देराम की तलाश कर रही है।
दूसरा मामला भी RPSC की हिन्दी प्राध्यापक भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है।
इस मामले में फलौदी निवासी अशोक जानी को डमी कैंडिडेट के रूप में गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया कि मूल अभ्यर्थी रामूराज एक भूतपूर्व सैनिक है। उसे पता था कि एक्स-सर्विसमैन कैटेगरी में मेरिट कम जाती है। इसी का फायदा उठाने के लिए उसने ज्यादा पढ़े-लिखे व्यक्ति को अपनी जगह परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई।
SOG के अनुसार रामूराज और अशोक जानी की मुलाकात जोधपुर में कोचिंग के दौरान हुई थी।
दोनों के बीच करीब 7.5 लाख रुपए में डील तय हुई थी। रामूराज को SOG पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अब अशोक जानी को भी पकड़ लिया गया है।
तीसरा मामला सितंबर 2023 में आयोजित शारीरिक शिक्षक अध्यापक सीधी भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है।
इस परीक्षा में मूल अभ्यर्थी विमल कुमार पाटीदार की जगह जालौर निवासी सुनील ने परीक्षा दी थी।
जांच में पता चला कि विमल पढ़ाई में कमजोर था और उसे परीक्षा पास करने का भरोसा नहीं था। इसलिए उसने जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे परिचित अनिल के जरिए सुनील से संपर्क किया।
दोनों पक्षों के बीच करीब 6 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और फर्जी दस्तावेजों के मामले तेजी से बढ़े हैं।
SOG का कहना है कि ऐसे मामलों में शामिल नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। कई बार पढ़ाई में कमजोर अभ्यर्थी पैसे देकर योग्य उम्मीदवारों को अपनी जगह परीक्षा में बैठाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं मेहनत करने वाले लाखों युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हैं।
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे घोटालों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बैठाने का यह मामला शिक्षा और भर्ती प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। SOG लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन ऐसे फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए और सख्त निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।
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