राजस्थान: के खैरथल-तिजारा जिले के खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में RIICO (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम) से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक औद्योगिक प्लॉट के पुनः आवंटन की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर करीब 140 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
मामला प्लॉट नंबर SP2-2 से जुड़ा है, जिसका क्षेत्रफल करीब 69,130 वर्ग मीटर बताया जा रहा है। इस पूरे विवाद ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। अब इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, यह प्लॉट M/s Thapar Concast Limited को 04 मार्च 1993 को मात्र 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटित किया गया था। इसके बाद 27 मार्च 1995 को कंपनी के नाम लीज डीड भी निष्पादित कर दी गई थी।
औद्योगिक क्षेत्र को 01 जनवरी 1998 को विकसित घोषित किया गया। RIICO के नियमों के मुताबिक, कंपनी को पांच वर्षों के भीतर यानी 31 दिसंबर 2002 तक उत्पादन शुरू करना अनिवार्य था।
लेकिन आरोप है कि कंपनी तय समय सीमा के भीतर उत्पादन शुरू करने में विफल रही, जो आवंटन शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है।
काफी लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद RIICO ने आखिरकार 07 अप्रैल 2021 और 08 जुलाई 2021 को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए।
इसके बाद 05 मई 2023 को RIICO ने प्लॉट का आवंटन रद्द कर दिया। वहीं 12 मई 2023 को प्लॉट का कब्जा भी अपने नियंत्रण में ले लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद कंपनी ने कई स्तरों पर राहत पाने की कोशिश की, लेकिन उसे लगातार झटके लगते रहे।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ अलग-अलग मंचों पर अपील की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
इसके बावजूद मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ और अब नए विवाद सामने आ रहे हैं।
कंपनी ने राजस्थान हाईकोर्ट में SBCW No. 6150/2026 के तहत याचिका दायर की। हालांकि, अदालत ने मामले में नोटिस जारी किए बिना कंपनी को RIICO के समक्ष अभ्यावेदन देने की छूट दी।
इसके बाद कंपनी ने अपनी याचिका वापस ले ली। यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुनः आवंटन की प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध शुरू की जा रही है।
इस पूरे प्रकरण में कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं—
आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर कंपनी को दोबारा लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्लॉट का पुनः आवंटन पुराने नियमों या कम दरों पर होता है, तो सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है।
इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर RIICO प्रशासन ने उच्च अदालत में आगे चुनौती क्यों नहीं दी।
विपक्षी स्वर यह भी आरोप लगा रहे हैं कि पूरे मामले में उच्च स्तर पर दबाव या मिलीभगत हो सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
जांच के लिए निम्न एजेंसियों के नाम सामने आ रहे हैं—
इसके साथ ही दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और पूरे मामले को तत्काल रोकने की मांग भी उठ रही है।
यह मामला केवल एक औद्योगिक प्लॉट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सरकारी पारदर्शिता, जवाबदेही और संसाधनों के उपयोग से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया जा रहा है।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह राजस्थान के औद्योगिक इतिहास के बड़े विवादों में शामिल हो सकता है।
खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया का यह विवाद अब केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया है। संभावित 140 करोड़ रुपये के नुकसान और नियमों के उल्लंघन के आरोपों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।
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