2 राज्यों में वोटर बना आतंकी ‘खरगोश’! फर्जी ID से चुनावी सिस्टम में घुसपैठ, जांच में बड़ा खुलासा

राजस्थान: और हरियाणा की चुनावी व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कुख्यात आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए दो राज्यों में अपनी मतदाता पहचान बनवा ली थी। यह खुलासा विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR-2026) के दौरान हुई जांच में हुआ, जिसके बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया।

जांच में सामने आया कि आतंकी उमर हारिस हरियाणा के नूंह जिले की पुनहाना विधानसभा सीट पर ‘सज्जाद अहमद’ नाम से मतदाता के रूप में पंजीकृत था। उसका EPIC नंबर IVG148216 बताया गया है। इतना ही नहीं, उसने 19 अगस्त 2023 को ऑनलाइन आवेदन कर राजस्थान की राजधानी जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र में भी इसी नाम से अपना वोटर पंजीकरण करा लिया था।

इस तरह वह करीब दो वर्षों तक दो अलग-अलग राज्यों में एक साथ मतदाता बना रहा और किसी भी स्तर पर उसकी पहचान पर सवाल नहीं उठे। यह मामला सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

SIR जांच में हुआ खुलासा

प्रशासन के मुताबिक यह पूरा मामला तब सामने आया जब विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR-2026) के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने मतदाता सूची का सत्यापन शुरू किया। जांच के दौरान पाया गया कि एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग राज्यों में एक ही नाम और संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर वोटर के रूप में दर्ज है।

जिला निर्वाचन अधिकारी और जयपुर कलेक्टर संदेश नायक ने पुष्टि की कि जांच पूरी होने के बाद हवामहल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से उसका नाम हटा दिया गया है। वहीं हरियाणा प्रशासन को भी इस संबंध में सूचना दे दी गई है।

सुरक्षा एजेंसियां हुईं अलर्ट

मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आतंकी को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में किन लोगों या नेटवर्क की भूमिका रही। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या यह केवल वोटर आईडी तक सीमित मामला है या इसके जरिए कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि किसी आतंकी का दो राज्यों में फर्जी पहचान बनाकर चुनावी दस्तावेज हासिल कर लेना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर मामला है। इससे यह आशंका भी बढ़ गई है कि आतंकी संगठन देश की पहचान और नागरिकता प्रणाली में सेंध लगाने की कोशिश कर सकते हैं।

चुनावी सिस्टम पर उठे सवाल

इस घटना ने चुनावी व्यवस्था की खामियों को भी उजागर कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे एक व्यक्ति बिना उचित सत्यापन के दो राज्यों में मतदाता बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और फील्ड वेरिफिकेशन को और मजबूत करने की जरूरत है।

राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई नेताओं ने कहा कि यदि समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो इसका दुरुपयोग चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए भी किया जा सकता था।

स्थानीय नेटवर्क की तलाश

सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां जयपुर और हरियाणा के उन लोगों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने दस्तावेज तैयार कराने या पहचान छिपाने में मदद की हो सकती है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को शक है कि इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या आतंकी ने इन पहचान पत्रों का इस्तेमाल बैंक अकाउंट, मोबाइल सिम या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने के लिए भी किया था।

प्रशासन ने शुरू किया सत्यापन अभियान

घटना सामने आने के बाद राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों में मतदाता सूचियों का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध दस्तावेजों और डुप्लीकेट नामों की विशेष जांच की जाए।

प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा ताकि किसी भी फर्जी पहचान को समय रहते पकड़ा जा सके।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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