जयपुर। प्रतापनगर में चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड की जांच अब एक नए और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस हिरासत में मौजूद 23 वर्षीय एलएलबी छात्रा आयुषी शर्मा पर अब अपनी मां की कथित सुपारी देकर हत्या कराने के साथ-साथ पिता विजय शर्मा की मौत में भी भूमिका होने के आरोप लगे हैं। परिजनों की शिकायत के बाद जयपुर पुलिस ने दोनों मामलों को जोड़कर जांच शुरू कर दी है।
जयपुर पूर्व की डीसीपी रंजीता शर्मा ने बताया कि परिवार की ओर से पिता की मौत को लेकर भी शिकायत दी गई है। इस पहलू की जांच नीरज शर्मा हत्याकांड की जांच के साथ ही की जा रही है। यदि किसी साजिश के प्रमाण मिलते हैं तो उसी आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयुषी के मामा राकेश शर्मा का आरोप है कि पिछले वर्ष ब्रेन स्ट्रोक के बाद विजय शर्मा को आयुषी और उसके चचेरे भाई बलराम ने परिवार से दूर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। उनका दावा है कि करीब तीन महीने तक परिवार को विजय शर्मा की वास्तविक स्थिति और इलाज की जानकारी नहीं दी गई।
राकेश शर्मा का यह भी आरोप है कि जब नीरज शर्मा अपने पति के बारे में पूछती थीं, तब उन्हें केवल यह बताया जाता था कि उनका इलाज चल रहा है। बाद में जब विजय शर्मा घर लौटे तो उनकी हालत बेहद गंभीर थी और कई अंग काम करना बंद कर चुके थे।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि विजय शर्मा की फीडिंग ट्यूब हटाने में भी आयुषी की भूमिका थी, जिससे उनकी मौत हुई। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस अब केवल नीरज शर्मा की हत्या ही नहीं, बल्कि विजय शर्मा की मौत, अनुकंपा नियुक्ति, पारिवारिक संपत्ति, आर्थिक लेन-देन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या दोनों घटनाओं के पीछे कोई साझा साजिश थी।
पुलिस जांच के अनुसार विजय शर्मा जयपुर कोर्ट में कोर्ट मास्टर थे। उनकी मृत्यु के बाद मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति को लेकर परिवार में विवाद शुरू हुआ। आयुषी खुद सरकारी नौकरी चाहती थी, लेकिन नौकरी उसकी मां नीरज शर्मा को मिली।
जांच में सामने आया कि आयुषी को आशंका थी कि उसकी मां पारिवारिक संपत्ति और सरकारी लाभ उसके मानसिक रूप से अस्वस्थ छोटे भाई के नाम कर सकती हैं। पुलिस इसी पहलू को हत्या की कथित साजिश का प्रमुख कारण मानकर जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार आयुषी अपने ताऊ के बेटे बलराम के साथ रहने लगी थी। वहीं दोनों ने नीरज शर्मा की हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि बलराम ने अपने परिचित हेमंत शर्मा को 7 लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी। इसके बाद आकाश, मोहित, अरविंद और रोहित सहित अन्य लोगों को भी इस साजिश में शामिल किया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि 3 जुलाई को नीरज शर्मा बेटे को अस्पताल छोड़कर लौट रही थीं। तभी तेज रफ्तार कार ने उन्हें कुचल दिया। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने इसे सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हत्या माना।
एसीपी हरिशंकर शर्मा के अनुसार कार की रफ्तार करीब 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी। सड़क पर पर्याप्त जगह होने के बावजूद चालक ने जानबूझकर वाहन को बाईं ओर मोड़कर टक्कर मारी और फरार हो गया।
पुलिस का दावा है कि नीरज शर्मा की हत्या की कोशिश करीब तीन महीने पहले भी की गई थी, लेकिन ट्रैफिक अधिक होने के कारण आरोपी अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। घटना के बाद नीरज शर्मा ने परिजनों से अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी।
इस मामले में पुलिस अब तक आयुषी शर्मा, मोहन शर्मा, हेमंत शर्मा, आकाश, मोहित, अरविंद और रोहित समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि मुख्य आरोपी बलराम अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.