स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस विशेष अभियान में आशा सहयोगिनी, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और चिकित्सा अधिकारी मिलकर घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की जांच करेंगे। स्क्रीनिंग के दौरान ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, शुगर लेवल, पोषण की स्थिति, गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन किया जाएगा। जिन महिलाओं में किसी प्रकार का जोखिम पाया जाएगा, उन्हें तुरंत उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सा संस्थानों को अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा प्रत्येक गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में प्रदेश के कई जिलों में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। इसी को देखते हुए सरकार ने यह व्यापक अभियान शुरू किया है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभियान के दौरान एक भी गर्भवती महिला जांच से वंचित न रहे, इसके लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। सरकार का लक्ष्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना, जटिल गर्भावस्था की समय पर पहचान करना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को प्रभावी ढंग से कम करना है।
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