राजस्थान के जोधपुर स्थित डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज जल्द ही मायसेटोमा (Mycetoma) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी के इलाज के लिए जापान में विकसित नई दवा का क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेगा। यह बीमारी मुख्य रूप से किसानों, मजदूरों और नंगे पैर खेतों में काम करने वाले लोगों को प्रभावित करती है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण त्वचा से हड्डियों तक फैल सकता है और कई मामलों में अंग काटने तक की नौबत आ जाती है।
मायसेटोमा बैक्टीरिया या फंगस के संक्रमण से होने वाली बीमारी है। इसकी शुरुआत आमतौर पर पैर या हाथ में बिना दर्द वाली छोटी गांठ से होती है, लेकिन धीरे-धीरे सूजन बढ़ने लगती है और घाव से मवाद निकलने लगता है। बीमारी बढ़ने पर हड्डियां भी संक्रमित हो सकती हैं, जिससे मरीज स्थायी रूप से विकलांग हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Disease) की श्रेणी में रखा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में इस बीमारी का इलाज लंबा, महंगा और कई बार पूरी तरह प्रभावी नहीं होता। ऐसे में जापान द्वारा विकसित नई दवा का ट्रायल मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद माना जा रहा है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो भविष्य में मरीजों को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और कम समय में इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि खेतों या कंटीले इलाकों में काम करते समय जूते पहनें और शरीर पर किसी भी असामान्य गांठ, सूजन या लंबे समय तक न भरने वाले घाव को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी के गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है
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