भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली नहीं, बल्कि आधुनिक न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी जहां विवाद का फैसला करती है, वहीं मध्यस्थता विवाद के मूल कारणों को समझकर सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तलाशती है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने कहा कि मध्यस्थता को विवाद समाधान का पहला विकल्प बनाया जाना चाहिए। वहीं राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने डिजिटल युग में मध्यस्थता को सबसे प्रभावी और भविष्य उन्मुख व्यवस्था बताया।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने लोक अदालतों और निःशुल्क विधिक सहायता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि न्याय केवल फैसलों तक सीमित नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और सामाजिक समरसता का माध्यम होना चाहिए। सम्मेलन में पारिवारिक, आपराधिक, व्यावसायिक, कार्यस्थल और अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता की भूमिका पर भी गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि मेडिएशन न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
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