राजस्थान में उद्योगों के लिए नई व्यवस्था लागू, प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जारी किया संशोधित वर्गीकरण

जयपुर।
राजस्थान में उद्योगों के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति और नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों का संशोधित एवं समेकित वर्गीकरण लागू कर दिया है। यह नया वर्गीकरण तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इससे जुड़े पूर्व में जारी सभी आदेश, परिपत्र और दिशा-निर्देश अब निरस्त माने जाएंगे।

मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने बताया कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक समान, वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रणाली विकसित करना है। इससे उद्योगों को पर्यावरणीय स्वीकृतियों (Consent) और अनुपालना संबंधी प्रक्रियाओं में स्पष्टता मिलेगी तथा अनुमोदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और समयबद्ध होगी।

संशोधित वर्गीकरण में उन औद्योगिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जो पहले सूची से बाहर थे। उद्योगों को उनके प्रदूषण संभाव्यता (Pollution Potential) के आधार पर रेड, ऑरेंज, ग्रीन और ब्ल्यू श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। नई सूची में सीमेंट, सिरेमिक, डेयरी, बायोगैस (CBG/Bio-CNG) संयंत्र, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, अस्पताल, होटल एवं रिसॉर्ट, निर्माण परियोजनाएं, बैटरी निर्माण, डिस्टिलरी, धातु प्रसंस्करण, औद्योगिक पार्क तथा अपशिष्ट उपचार एवं निस्तारण सुविधाओं सहित अनेक औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए लगातार सुधार कर रही है। इसी दिशा में उद्योगों के लिए पर्यावरणीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को अपनी श्रेणी और लागू पर्यावरणीय प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी, जिससे अनावश्यक भ्रम समाप्त होगा और अनुपालना प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल का उद्देश्य उद्योगों को बेहतर नियामकीय सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है। नया वर्गीकरण राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने, उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने और सतत औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

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