राजस्थान सरकार उद्योगों को अपेक्षाकृत सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए नई टैरिफ व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित मॉडल के तहत दिन के समय, जब सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक रहता है और बिजली की उपलब्धता पर्याप्त होती है, उद्योगों को कम दर पर बिजली दी जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों की उत्पादन लागत कम करना और अक्षय ऊर्जा के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है।
प्रस्तावित मॉडल में टैरिफ समय के अनुसार तय की जाएगी। दिन में जब सौर ऊर्जा उत्पादन ज्यादा होता है और बिजली की उपलब्धता अधिक रहती है, तब टैरिफ कम रखा जा सकता है। इससे उद्योग अपनी बिजली खपत को कम दर वाले समय में शिफ्ट कर सकेंगे और ऊर्जा खर्च में कटौती कर सकेंगे।
राजस्थान राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने पहले ही 'टाइम ऑफ यूज (TOU) टैरिफ' कंसेप्ट पेश किया है, जिसके तहत बिजली की दरें दिन के अलग-अलग समय के अनुसार तय की जाती हैं। इस मॉडल से आम लोग भी अपने रोजमर्रा के काम ऐसे समय में कर सकेंगे जब बिजली सस्ती होगी। इसका परिणाम यह होगा कि बिजली का बिल कम होगा और पीक समय में बिजली व्यवस्था पर दबाव घटेगा।
राजस्थान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का अग्रणी राज्य है। राज्य के विशाल रेगिस्तानी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। दिसंबर 2025 तक राजस्थान की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता 35,000 मेगावाट (35 गीगावाट) को पार कर चुकी है, जो देश की कुल सौर क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत है। भदला सोलर पार्क जैसी विश्व स्तरीय परियोजनाएं राज्य में स्थापित हैं। सौर ऊर्जा से लाखों घरों को स्वच्छ बिजली मिल रही है, कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार की नीतियों, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं ने इस सफलता को गति दी है। राजस्थान अब भारत का ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में अग्रसर है।
राजस्थान पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी प्रमुख राज्य है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण पवन ऊर्जा की संभावनाएं अत्यधिक हैं। दिसंबर 2025 तक राज्य की पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता 5,195.82 मेगावाट (लगभग 5.2 गीगावाट) पहुंच चुकी है, जिससे राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। जैसलमेर पवन ऊर्जा क्लस्टर जैसी बड़ी परियोजनाएं राज्य में संचालित हैं। पवन ऊर्जा से भी लाखों घरों को स्वच्छ बिजली मिल रही है और यह राज्य की कुल बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
इस नई टैरिफ व्यवस्था और अक्षय ऊर्जा की अधिकतम उपयोगिता से न केवल उद्योगों की लागत कम होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। राजस्थान की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकती है और अक्षय ऊर्जा आधारित विकास में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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