उत्तर पश्चिम रेलवे में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से ट्रेनों की गति और क्षमता में सुधार

जयपुर समेत उत्तर पश्चिम रेलवे के व्यस्त रेल मार्गों पर यात्रियों के लिए राहत की खबर है। आउटर पर ट्रेनों का लंबा इंतजार और सिग्नल की वजह से होने वाली देरी अब काफी हद तक कम हो सकेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपने व्यस्त रेलखंडों पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और मल्टी सेक्शन एक्सल काउंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीक लागू की है। इस प्रणाली के तहत लंबे ब्लॉक सेक्शन को कई छोटे इलेक्ट्रॉनिक ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है, जिससे सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक ही ट्रैक पर कई ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 355 किलोमीटर रेलखंड पर यह तकनीक लागू हो चुकी है और 530 किलोमीटर रेलखंड पर कार्य प्रगति में है। इसके अलावा, 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालन के लिए डबल डिस्टेंट सिग्नलिंग पालनपुर-अजमेर, कानोता-बावल, अनाजमंडी-रेवाड़ी, खेरोदा-कानोर और लूनी-मारवाड़ रेलखंडों पर पूरी की जा चुकी है।

नई प्रणाली से मौजूदा ट्रैक की लाइन क्षमता औसतन 80 से 90 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है, और इसके लिए नई लाइन बिछाने या भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। मल्टी सेक्शन एक्सल काउंटर ट्रेन के एक्सलों की गणना कर यह सुनिश्चित करता है कि ट्रैक खंड खाली है या उस पर कोई ट्रेन मौजूद है। इससे ट्रैक की स्थिति की सटीक और रियल टाइम जानकारी मिलती रहती है।

इस तकनीक से सिग्नल फेल होने की घटनाओं में कमी आएगी, ट्रेनों का अनावश्यक ठहराव घटेगा, सुरक्षा मजबूत होगी और संचालन अधिक विश्वसनीय बनेगा। व्यस्त रूट जैसे रेवाड़ी-जयपुर-अहमदाबाद पर इसकी मदद से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, ट्रैक की निगरानी 24 घंटे हो सकेगी और यात्रियों को समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा।

अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे के अनुसार, यह तकनीक क्षमता विस्तार का किफायती और प्रभावी विकल्प है और इसे लागू करने से रेलवे संचालन आधुनिक और सुरक्षित बन जाएगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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