धौलपुर। राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की सीमा से होकर गुजर रही चंबल नदी में इस समय घड़ियाल और बाटागुर कछुओं के लिए एक नया जीवन शुरू हुआ है। धौलपुर राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के डीएफओ वन्यजीव डॉक्टर आशीष व्यास और क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक कुमार मीणा की देखरेख में नदी के किनारों पर घड़ियाल और बाटागुर के अंडों का हैचिंग जारी है।
नदी में नर और मादा घड़ियाल अपने बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, जबकि जमीन पर वन विभाग के गार्ड सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। बाटागुर कछुआ एक बार में 18–22 अंडे देता है और बाटागुर धोंनकोगा 25–28 अंडे देता है। अंडों से निकलते ही बच्चों को केमिकल से नहलाया जाता है और 15 दिन के क्वारंटीन पूल में रखा जाता है।
इस दौरान मानसून की बाढ़ और तेज बहाव सबसे बड़ा खतरा हैं। प्राकृतिक हैचिंग साइट्स के अलावा मध्य प्रदेश के देवरी घड़ियाल सेंटर में 30–35 डिग्री तापमान में कृत्रिम हैचिंग की जा रही है। यह प्रयास प्रजातियों के संरक्षण और अवैध तस्करी से बचाव के लिए किया जा रहा है।
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