राजस्थान में सर्पदंश से बढ़ती मौतें, 5 साल में 2170 लोगों की गई जान

राजस्थान में सर्पदंश की घटनाएं लगातार गंभीर समस्या बनती जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025-26 तक राज्य में 75,500 से अधिक सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 2170 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में सिर्फ 10 दिनों के भीतर 5 से अधिक लोगों की मौत होने से यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। बाड़मेर, अलवर, कोटा, खैरथल-तिजारा और अन्य जिलों में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 सबसे घातक वर्ष रहा, जब 16,500 मामलों में 480 मौतें दर्ज की गईं। वर्ष 2022 में 15,100 मामलों में 455 मौतें और वर्ष 2023 में 13,800 मामलों में 390 लोगों की जान गई। वहीं 2021 में 14,200 मामलों में 410 मौतें हुईं। 2025-26 में अब तक 15,900 मामले और 435 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच सर्पदंश के मामले सबसे अधिक होते हैं, क्योंकि मानसून में खेतों और ग्रामीण इलाकों में सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।

राजस्थान के कोटा, बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा और उदयपुर जैसे दक्षिणी और हाड़ौती क्षेत्र सर्पदंश के हॉटस्पॉट माने जाते हैं। इसके अलावा बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर जैसे पश्चिमी जिलों में भी जहरीले सांपों के कारण गंभीर घटनाएं सामने आती हैं। राज्य में 32 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन स्पेक्टेकल्ड कोबरा, रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और कॉमन क्रैट सबसे खतरनाक माने जाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अध्ययन के अनुसार लगभग 52 प्रतिशत लोग अस्पताल पहुंचने से पहले झाड़-फूंक और तांत्रिक उपचार में समय गंवा देते हैं, जिससे कई मामलों में जान बचाना मुश्किल हो जाता है। चिकित्सकों के अनुसार सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी इलाज एंटी-स्नेक वेनम है, जो सभी जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कराया गया है, लेकिन जागरूकता की कमी अभी भी चिंता का विषय है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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