मुस्लिम प्रोग्रेसिव फ़ेडरेशन राजस्थान के कन्वीनर अब्दुल सलाम जौहर ने समाज की सभी बिरादरियों से अपील की है कि विवाह समारोहों में सादगी अपनाई जाए और सामूहिक विवाह सम्मेलनों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि शादियों को बिना दहेज, बिना बैंड-बाजा और बिना अनावश्यक खर्चों के सरल तरीके से संपन्न किया जाना चाहिए ताकि समाज में आर्थिक बोझ और दिखावे की प्रवृत्ति को कम किया जा सके।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वर्तमान समय में कई गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपनी बेटियों के विवाह को लेकर गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। महंगी शादियों, दहेज प्रथा और अनावश्यक रस्मों के कारण कई परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है, जिससे कई बार विवाह समय पर नहीं हो पाते। इससे सामाजिक तनाव, पारिवारिक परेशानियाँ और कई जगहों पर विवाद की स्थिति भी उत्पन्न होती है।
अब्दुल सलाम जौहर ने यह भी कहा कि कई बार आर्थिक मजबूरी के कारण परिवार अपनी बेटियों का उचित समय पर विवाह नहीं कर पाते, जिससे समाज में असंतुलन की स्थिति बनती है। उन्होंने यह चिंता भी जताई कि ऐसी परिस्थितियों में कुछ मामलों में गलत निर्णय लेने की घटनाएँ भी सामने आती हैं, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक सम्मान को ठेस पहुँचती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन इस समस्या का एक प्रभावी समाधान है। इज्तिमाई विवाह से न केवल खर्च कम होता है बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भी सम्मानपूर्वक अपने बच्चों का विवाह करने का अवसर मिलता है। इससे समाज में समानता, सहयोग और आपसी एकता को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विवाह समारोहों में बचाए गए धन का उपयोग बच्चों की शिक्षा, उच्च तालीम, कौशल विकास और रोजगार प्रशिक्षण में किया जाना चाहिए, जिससे समाज के कमजोर वर्गों का भविष्य बेहतर बनाया जा सके।
साथ ही उन्होंने सभी समाजों और बिरादरियों से आग्रह किया कि वे सामूहिक विवाह सम्मेलनों को अधिक से अधिक आयोजित करें और इसे सामाजिक सुधार के रूप में अपनाएं। उन्होंने कहा कि जो समाज इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, वही आने वाले समय में अधिक संगठित, मजबूत और प्रगतिशील बनेंगे।
अंत में उन्होंने सभी जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा दें, दिखावे और फिजूलखर्ची को त्यागें और समाज में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करें।
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