फादर्स डे के अवसर पर जैसलमेर जिले से दो ऐसी प्रेरक कहानियां सामने आई हैं, जो पिता के संघर्ष, त्याग और समर्पण को दर्शाती हैं। यहां दो सिंगल फादर्स ने अपनी जीवनसंगिनी को खोने के बाद न केवल परिवार को संभाला, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को भी संवारकर उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इन पिताओं ने बच्चों को मां की कमी कभी महसूस नहीं होने दी और हर कदम पर उनका सहारा बने रहे।
सांगड़ गांव निवासी उगमदान बारहठ की पत्नी संतोष कंवर के असमय निधन के बाद उनके जीवन में कठिन समय आ गया, लेकिन उन्होंने अपने तीनों बेटों के भविष्य को अपनी प्राथमिकता बनाया। पूर्व शिक्षा अधिकारी रहे उगमदान ने बच्चों को अनुशासन और शिक्षा के महत्व से जोड़ा और मां की कमी कभी महसूस नहीं होने दी। उनके प्रयासों का परिणाम यह रहा कि उनके बड़े बेटे ललित चारण तहसीलदार बने, दूसरे बेटे अशोक चारण भारतीय राजस्व सेवा में संयुक्त आयुक्त पद पर पहुंचे और तीसरे बेटे हिम्मतसिंह चारण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
इसी तरह सुशील गोपा ने कोरोना महामारी में अपनी पत्नी पद्मा गोपा को खोने के बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी अकेले संभाली। उन्होंने पिता के साथ-साथ मां की भूमिका भी निभाई और बच्चों की पढ़ाई, भावनात्मक सहारा और जीवन के हर पहलू में उनका साथ दिया। उनकी बड़ी बेटी नेहा यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं, जबकि छोटी बेटी वसुंधरा हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं।
इन कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि माता-पिता का समर्पण मजबूत हो, तो बच्चे किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। यह दोनों परिवार इस बात के उदाहरण हैं कि पिता का प्यार और त्याग बच्चों के जीवन की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
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