शहरी निकाय चुनाव में भजनलाल सरकार पर भरोसा! जयपुर, कोटा, भीलवाड़ा और उदयपुर में BJP को पूर्ण बहुमत

जयपुर। राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में भाजपा के पक्ष में मजबूत जनादेश का संकेत दिया है। जयपुर, कोटा, भीलवाड़ा और उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया है। वहीं पाली, अजमेर, जोधपुर, अलवर और भरतपुर में भी भाजपा निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से बोर्ड बनाने की स्थिति में नजर आ रही है।

इन पांच नगर निगमों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। भाजपा को बहुमत के लिए जरूरी संख्या पूरी करने में निर्दलीयों का समर्थन लेना पड़ सकता है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद इन निकायों में 'किंगमेकर' की भूमिका में रहेंगे।

10 में से 9 नगर निगम में BJP का मेयर बनने की संभावना

चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश के कुल 10 नगर निगमों में से 9 में भाजपा का मेयर बनने की संभावना जताई जा रही है। चार नगर निगमों में पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि अन्य पांच नगर निगमों में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है।

इसके अलावा प्रदेश की 22 नगर परिषदों में भाजपा का सभापति बनने की स्थिति बन रही है। कई अन्य नगर परिषदों में भी निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से भाजपा बोर्ड बनाने की तैयारी में है।

133 नगर पालिकाओं में BJP का बोर्ड

नगर पालिकाओं के परिणाम भी भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं। प्रदेश की 133 नगर पालिकाओं में भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है। इससे साफ है कि शहरी क्षेत्रों में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला है।

भजनलाल शर्मा के प्रचार अभियान का दिखा असर

चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में रोड शो और जनसभाएं की थीं। भाजपा ने सरकार के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया। पार्टी नेताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री के व्यापक जनसंपर्क अभियान का चुनाव परिणामों पर सकारात्मक असर पड़ा है।

भाजपा की इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बधाई दी है।

Exit Poll के अनुमान पर भी लगी मुहर

शहरी निकाय चुनाव के परिणामों को भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही, इस जनादेश के बाद फर्स्ट इंडिया के Exit Poll के अनुमानों पर भी मुहर लगने का दावा किया जा रहा है।

कुल मिलाकर शहरी निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन ने राजस्थान की शहरी राजनीति में पार्टी की मजबूत पकड़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब निगाहें उन नगर निगमों और निकायों पर हैं, जहां निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन और मेयर-सभापति के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

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