धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की याद में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यह परंपरा लोगों को संदेश देती है कि अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
विजयादशमी का संबंध मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने नौ दिनों तक युद्ध करने के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया था। इसी कारण यह पर्व शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक भी माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस अवसर पर दुर्गा पूजा के समापन और मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है।
विजयादशमी के अवसर पर देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न परंपराएं देखने को मिलती हैं। कई स्थानों पर भव्य रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है, जबकि शाम के समय रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और लोग एक-दूसरे को दशहरे की शुभकामनाएं देते हैं।
कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा, वाहन पूजा और नए कार्यों की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है। यह पर्व समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।
विजयादशमी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे विचारों और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि हमें अपने भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार, लालच और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। सत्य, ईमानदारी और न्याय के मार्ग पर चलकर ही जीवन में वास्तविक सफलता प्राप्त की जा सकती है।
इस विजयादशमी पर संकल्प लें कि हम समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देंगे तथा बुराई के विरुद्ध हमेशा सत्य और धर्म का साथ देंगे।
TNI आवाज़ परिवार की ओर से आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
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