राजस्थान में दशहरे की धूम: अजमेर में 125 ड्रोन से लिखा ‘जय श्रीराम’, जयपुर में 110 फीट के रावण का दहन

जयपुर। राजस्थान में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। कहीं आसमान में ड्रोन शो के जरिए ‘जय श्रीराम’ लिखा गया, तो कहीं रावण के पुतलों से निकलती आग और रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अलवर और श्रीगंगानगर सहित कई शहरों में दशहरा महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग जुटे।

इस बार दशहरा आयोजनों में पारंपरिक रामलीला और रावण दहन के साथ आधुनिक तकनीक का भी अनूठा संगम देखने को मिला। ड्रोन शो, लेजर लाइट, इलेक्ट्रिक बटन से पुतलों का दहन और आकर्षक आतिशबाजी कार्यक्रमों के प्रमुख आकर्षण रहे।

अजमेर में 125 ड्रोन ने आसमान में लिखा ‘जय श्रीराम’

अजमेर के पटेल स्टेडियम में नगर निगम की ओर से आयोजित दशहरा महोत्सव में पहली बार ड्रोन शो आकर्षण का केंद्र बना। करीब 125 ड्रोन ने आसमान में ‘जय श्रीराम’ लिखकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस नजारे को देखने के लिए स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

कार्यक्रम के दौरान लेजर शो के जरिए रामायण की कथा भी आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत की गई। इसके अलावा भगवान हनुमान द्वारा सोने की लंका के दहन का मंचन किया गया। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और महापौर अनामिका शर्मा ने भी हनुमानजी की गदा से रावण के पुतले पर प्रतीकात्मक प्रहार किया।

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में भी दशहरे पर एक विशेष पहल देखने को मिली। जेल में बंद एक हार्डकोर अपराधी ने आटा, पुराने अखबार, गत्ते और रंगीन कागजों की मदद से रावण का पुतला तैयार किया। पुलिस अधीक्षक पारस जांगिड़ ने इसका दहन किया। जेल प्रशासन की ओर से इस तरह की गतिविधियों के जरिए बंदियों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

जयपुर में अलग-अलग स्थानों पर रावण दहन

राजधानी जयपुर में दशहरे का उत्साह देखने को मिला। आदर्श नगर दशहरा मैदान में रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। यहां श्रीराम की शोभायात्रा और आकर्षक आतिशबाजी ने लोगों का ध्यान खींचा।

आयोजकों की ओर से आदर्श नगर में 105 फीट ऊंचे रावण और 90 फीट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले के दहन का कार्यक्रम रखा गया था। वहीं, विद्याधर नगर स्टेडियम में 121 फीट ऊंचे रावण के दहन का आयोजन निर्धारित किया गया।

आदर्श नगर मैदान में रावण दहन के दौरान आग फैलने की सूचना पर दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित टीमों ने कार्रवाई की।

जयपुर के गुप्त वृन्दावन धाम में भी विजयादशमी पर रामलीला और रावण दहन का आयोजन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा बाण चलाते ही श्रद्धालुओं ने ‘जय श्रीराम’ के जयकारे लगाए।

यहां रामलीला में अरण्य कांड का मंचन किया गया। लगभग दो घंटे तक चले मंचन में शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, त्रिशिरा वध, मारीच का स्वर्ण मृग बनना, साधु के वेश में रावण द्वारा माता सीता का हरण और पक्षीराज जटायु का रावण से युद्ध जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए गए।

श्रीगंगानगर में 70 फीट के रावण ने उगली आग

श्रीगंगानगर में दशहरा महोत्सव के दौरान 70 फीट ऊंचे रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र रहा। पुतले की आंखों और मुंह से आग निकलने का विशेष प्रभाव तैयार किया गया था। रावण दहन के दौरान इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

अलवर में भी रावण दहन के दौरान विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यहां रावण की आंखों से आंसू निकलने के बाद जीभ और सिर से चिंगारियां निकलने का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद तेज धमाके के साथ रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। कार्यक्रम में वन राज्य मंत्री संजय शर्मा भी पहुंचे।

जोधपुर में बटन दबाते ही जल उठा रावण

जोधपुर के रामलीला मैदान में नगर निगम की ओर से 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। मेयर प्रसन्न चंद मेहता, कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल और पूर्व राजपरिवार के सदस्य गजसिंह ने इलेक्ट्रिक बटन दबाकर रावण दहन किया। इसके बाद आतिशबाजी की गई।

रावण दहन से पहले शहर के भीतरी हिस्से में फतेहपोल से रामरथ की सवारी निकाली गई। इसमें शामिल अखाड़ों के सदस्यों ने पारंपरिक करतब दिखाए और मुंह से आग निकालने की प्रस्तुति दी। शोभायात्रा और अखाड़ों के प्रदर्शन ने दशहरा उत्सव को खास बनाया।

कोटा में 105 फीट के रावण का दहन, राजसी परंपराओं की झलक

कोटा में दशहरा महोत्सव के लिए दशहरा मैदान स्थित विजयश्री रंगमंच के सामने 105 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रात 7:31 बजे से 8:31 बजे के बीच रावण दहन का समय रखा गया था।

कोटा के दशहरा आयोजन की खास पहचान यहां की पारंपरिक धार्मिक और राजसी परंपराएं भी हैं। गढ़ पैलेस में ‘दरीखाना’ सजाने की व्यवस्था की गई, जिसमें हाड़ौती क्षेत्र के पूर्व ठिकानों के प्रतिनिधियों के राजसी वेशभूषा में शामिल होने का कार्यक्रम था।

भगवान लक्ष्मीनारायणजी की पूजा-अर्चना के बाद उनकी सवारी दशहरा मैदान पहुंचने का कार्यक्रम रखा गया। इसके बाद ज्वारा पूजन और सीताजी के पाने का पूजन सहित पारंपरिक रस्में आयोजित की जानी थीं।

कोटा जिले के नांता स्थित बड़ा अखाड़ा परिसर में जेठी समाज ने करीब 150 साल पुरानी परंपरा निभाई। यहां अखाड़े की मिट्टी से बनाए गए प्रतीकात्मक रावण की पूजा-अर्चना के बाद उसे पैरों से रौंदा गया। यह परंपरा रियासतकालीन समय से चली आ रही है।

उदयपुर में सोने की लंका का दहन

उदयपुर के गांधी ग्राउंड में दशहरा महोत्सव के दौरान 100 फीट की सोने की लंका का विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हनुमानजी ने अपनी पूंछ से लंका में आग लगाने का मंचन किया। इसके बाद धमाके के साथ लंका के जलने का दृश्य प्रस्तुत किया गया।

लंका दहन के बाद कुंभकर्ण, मेघनाद और रावण के पुतलों का दहन किया गया। भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे कलाकार ने तीर चलाकर रावण के पुतले में आग लगाई। इसके साथ ही मैदान में मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।

उदयपुर में विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पथ संचलन भी निकाला गया। सूरजपोल स्थित आरसीए खेल मैदान में शस्त्र पूजन और बौद्धिक कार्यक्रम के बाद स्वयंसेवक शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर लोगों और सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।

बीकानेर में 85 फीट और जालोर में पारंपरिक तरीके से रावण दहन

बीकानेर के डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में 85 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण दहन के बाद करीब आधे घंटे तक आतिशबाजी की गई।

जालोर के शाह पूंजाजी गेनाजी स्टेडियम में जिला कलेक्टर प्रदीप गवांडे और चामुंडा माता मंदिर के महंत पवन पुरी महाराज ने रावण दहन किया। इसके बाद आतिशबाजी का आयोजन हुआ।

जैसलमेर के शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बटन दबाकर रावण दहन किया। इसके बाद कुछ मिनट तक आतिशबाजी हुई और उत्सव का माहौल बना रहा।

सीकर में रावण दहन से पहले बावड़ी गेट से भगवान श्रीराम की शाही सवारी रामलीला मैदान पहुंचने का कार्यक्रम रखा गया। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम और उनकी सेना की झांकियां शामिल रहीं।

दशहरा महोत्सव में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम

राजस्थान में इस बार विजयादशमी के आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के मेल के रूप में सामने आए। अजमेर के ड्रोन शो से लेकर श्रीगंगानगर के विशेष प्रभाव वाले रावण, जोधपुर के इलेक्ट्रिक दहन और उदयपुर की सोने की लंका तक, अलग-अलग शहरों में उत्सव की अपनी विशिष्ट झलक देखने को मिली।

दशहरा पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्रदेशभर में आयोजित रामलीलाओं, शोभायात्राओं, धार्मिक अनुष्ठानों और रावण दहन कार्यक्रमों के माध्यम से यही संदेश दिया गया कि अहंकार, अन्याय और बुराई का अंत निश्चित है।

 

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