शांति वन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा सेवा, साधना, शांति और विश्व बंधुत्व का प्रेरक उदाहरण है। संस्थान की थीम ‘जागृति से कर्म तक’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जागरूकता तभी सार्थक होती है, जब व्यक्ति अपने विचारों को व्यवहार में उतारकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाता है।
नितिन नवीन ने ब्रह्माकुमारी संस्थान में महिला नेतृत्व की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं का ज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वुमन-लेड डेवलपमेंट’ विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में होने वाला विकास समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, नशा मुक्ति अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
राज्यसभा सांसद ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को देश के नागरिकों का साझा संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने मूल्य शिक्षा को युवाओं तक पहुंचाने, सेवा भावना के साथ समाज के बीच काम करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने संस्थान के 90वें स्थापना वर्ष के अवसर पर 90 लाख पौधे लगाने, एक लाख से अधिक रक्तदान करने और 90 प्रमुख शहरों में आध्यात्मिक सभाएं आयोजित करने जैसे संकल्पों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से भारतीय योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान राजयोग के माध्यम से विश्व शांति और कल्याण के लिए कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया को दिए गए ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ के संदेश का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति की व्यापक कल्याणकारी भावना को रेखांकित किया।
उन्होंने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तथा सोमनाथ, काशी और महाकाल लोक में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आध्यात्मिक विकास और प्रकृति संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। देवालयों, संतों और लोक देवताओं से जुड़े तीर्थ स्थलों के विकास के साथ पैनोरमा निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश में 29 करोड़ पौधे लगाए जाने की जानकारी दी। साथ ही खेजड़ी सहित 29 वृक्षों के संरक्षण के लिए विधेयक लाने और गोवंश व गोपालकों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति समस्त जीव-जगत, प्रकृति और पर्यावरण के कल्याण की भावना पर आधारित है। गंगा-यमुना जैसी नदियों, पर्वतों और खेजड़ी-पीपल जैसे वृक्षों के प्रति सम्मान इसी सांस्कृतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आबूराज के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर रही है। क्षेत्र में एयर स्ट्रिप के विकास से कनेक्टिविटी बेहतर होने और पर्यटन सहित अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांति वन में मेडिटेशन कर लोक कल्याण की कामना की। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद मदन राठौड़, ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी दीदी, अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बी.के. मृत्युंजय सहित संस्थान के पदाधिकारी और देश-विदेश से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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