जानकारी के अनुसार, धमाके से करीब 45 मिनट पहले रात 9 बजे एक पैसेंजर ट्रेन इस ट्रैक से गुजरी थी। इसके बाद रात करीब 9:45 बजे जोरदार धमाका हुआ। धमाके की आवाज लगभग 200 मीटर दूर तक सुनाई दी। आवाज सुनकर आसपास की ढाणियों में रहने वाले ग्रामीण रेलवे ट्रैक के पास पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद रात करीब 11 बजे पुलिस और प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं।
रेलवे ट्रैक के स्लीपर और लॉक टूटे
धमाके की वजह से रेलवे ट्रैक के नीचे लगे सीमेंट के दो स्लीपर पूरी तरह टूट गए। पटरी के बीच करीब दो फीट गहरा गड्ढा हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी बताई जा रही है कि पटरी को स्लीपर से जोड़ने वाले लॉक भी टूट गए। रेलवे ट्रैक को हुए नुकसान के बाद इस रूट पर रेल यातायात रोक दिया गया।
IB, CID और ATS की टीमों ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीआईडी और एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) की टीमें मौके पर पहुंचीं। रात करीब 2 बजे IB और CID की टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद एटीएस के एडिशनल एसपी सुरेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे।
एफएसएल टीम ने घटनास्थल से सैंपल एकत्र किए हैं। श्रीगंगानगर एसपी हरिशंकर के मुताबिक, धमाके की तीव्रता और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने के पीछे किसका हाथ है, इसकी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही धमाके की वजह और इसके पीछे की साजिश को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
4 ट्रेनें रद्द, रेल यातायात प्रभावित
सुरक्षा कारणों से बुधवार सुबह 9 बजे तक इस रेलवे लाइन पर रेल यातायात बंद रखा गया। इसके चलते बुधवार को इस रूट पर चलने वाली चार ट्रेनें रद्द कर दी गईं। रेलवे की टीमें ट्रैक की स्थिति का निरीक्षण कर रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जांच की जा रही है।
अक्टूबर में श्रीगंगानगर में पकड़ी गई थी विस्फोटक सामग्री
इस घटना के बीच श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी क्षेत्र में अक्टूबर में सुरक्षा एजेंसियों की ओर से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद किए जाने का मामला भी चर्चा में है। उस कार्रवाई में 7.750 किलोग्राम RDX, दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन, करीब 867 कारतूस, पांच बैटरी और दो रिमोट बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। आशंका जताई गई थी कि यह सामग्री ड्रोन के जरिए पाकिस्तान की ओर से गिराई गई थी। हालांकि, रेलवे ट्रैक पर हुए धमाके से इस बरामदगी का कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
राजस्थान में पहले भी सामने आ चुके हैं रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़ के मामले
राजस्थान में इससे पहले भी रेलवे ट्रैक पर बाधा डालकर ट्रेनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के मामले सामने आए हैं।
19 जनवरी 2026: जयपुर में महाराजा एक्सप्रेस के रेलवे ट्रैक पर लोहे के एंगल रखे जाने का मामला सामने आया था। लोको पायलट ने समय रहते ट्रेन रोक दी थी।
7 अप्रैल 2026: चित्तौड़गढ़ में ओराई नदी की पुलिया पर रेलवे ट्रैक पर लोहे का टुकड़ा रखकर मालगाड़ी को बेपटरी करने की कोशिश की गई थी। इंजन टुकड़े से टकराया, लेकिन बड़ा हादसा टल गया।
23 अगस्त: पाली में वंदे भारत ट्रेन के ट्रैक पर सीमेंट का ब्लॉक रखे जाने की घटना सामने आई थी। ट्रेन ब्लॉक से टकराई थी।
फिलहाल श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही हैं।
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