राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर सरकार सख्त, 6 टास्क फोर्स का गठन; जोजरी, बांडी और लूनी नदी क्षेत्र में होगी निगरानी

जयपुर, 5 नवंबर। राजस्थान में अवैध बजरी खनन, परिवहन और भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। जोजरी, बांडी और लूनी नदी के बहाव क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों की निगरानी और कार्रवाई के लिए छह टास्क फोर्स का गठन किया गया है। ये टीमें सिरोही, सोजत सिटी, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और गोटन में तैनात रहेंगी।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने बताया कि टास्क फोर्स को हाईलेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

तीन मीटर से अधिक गहराई तक खनन पर होगी जांच

टास्क फोर्स खनिज बजरी खनन पट्टाधारकों की गतिविधियों की नियमित जांच करेगी। इसमें पर्यावरण क्लीयरेंस की शर्तों, नदी क्षेत्र में अधिकतम तीन मीटर तक निर्धारित खनन सीमा और नदी के किनारों से तय दूरी छोड़ने जैसे नियमों की पालना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इसके अलावा पानी की सतह से नीचे बजरी खनन और निर्धारित गहराई से अधिक खनन किए जाने की शिकायतों की भी जांच होगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत होगी कार्रवाई

एसीएस अपर्णा अरोरा के अनुसार, राज्य सरकार अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। टास्क फोर्स को भारत सरकार की 'Enforcement and Monitoring Guidelines for Sand Mining, 2020' के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही अधिकारियों को MMDR एक्ट की धारा 23B और राजस्थान अप्रधान खनि रियायत नियम, 2017 के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं।

अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

गठित टास्क फोर्स में सहायक खनि अभियंता स्तर के अधिकारी को प्रभारी बनाया गया है। इनके साथ भूवैज्ञानिक, खनि कार्यदेशक और सर्वेयर स्तर के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अन्य क्षेत्रों के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इन टीमों में लगाया गया है।

वहीं, अतिरिक्त निदेशक सतर्कता मुख्यालय को टास्क फोर्स का नोडल अधिकारी बनाया गया है। सरकार ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन के खिलाफ नियमित निगरानी रखी जाए और कार्रवाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार के इस कदम से जोजरी, बांडी और लूनी नदी क्षेत्र में बजरी खनन की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ने और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद है।

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