रूस की ओर से प्रस्तावित रेल कनेक्टिविटी को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब बोस्फोरस और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग भू-राजनीतिक तनाव के कारण व्यापार के लिए जोखिम वाले क्षेत्र बन रहे हैं। रूसी पक्ष का मानना है कि भारत तक एक वैकल्पिक ओवरलैंड रेल नेटवर्क विकसित होने से माल ढुलाई के लिए नया और अधिक सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
प्रस्तावित रेल कॉरिडोर के संभावित मार्ग में रूस से मध्य एशिया और आगे दक्षिण एशिया के रास्ते भारत तक पहुंचने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह एक प्रस्ताव और संभावित परियोजना के स्तर पर है और इसके लिए विस्तृत तकनीकी, वित्तीय एवं कूटनीतिक अध्ययन की आवश्यकता होगी।
अगर यह परियोजना भविष्य में आकार लेती है तो भारत और रूस के बीच माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा हो सकता है। रेल नेटवर्क के जरिए दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही के लिए समुद्री मार्गों के साथ एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा।
इससे रूस और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक संपर्क को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि, इसे फिलहाल भारत-रूस के बीच शुरू होने वाली सीधी ट्रेन सेवा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रूस ने इस तरह की रेल कनेक्टिविटी की संभावना तलाशने की बात कही है। वास्तविक परियोजना के लिए रूट, निवेश, सीमा-पार रेल व्यवस्था, विभिन्न देशों की सहमति और तकनीकी व्यवहार्यता जैसे कई पहलुओं पर काम करना होगा।
अगर यह प्रस्ताव वास्तविकता में बदलता है, तो भारत और रूस के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी के साथ पूरे यूरेशियाई क्षेत्र में परिवहन नेटवर्क का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
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