समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने जीवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ बिताए समय के अनुभव भी साझा किए।
राज्यपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वे चुनावी राजनीति से दूर रहकर जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले व्यक्तित्व थे।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने गरीब और वंचित वर्ग के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने गरीब को परमेश्वर मानते हुए अंत्योदय की संकल्पना प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण का लाभ पहुंचाना था।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को अपनाने और उनके पदचिन्हों पर चलने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि उनके विचार आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित भी किया। उन्होंने राष्ट्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उनके योगदान को सराहा।
इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और उनके सामाजिक दर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला।
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