राजस्थान के टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगी नई दिशा, सर्कुलर इकोनॉमी पर होगा फोकस

जयपुर, 18 अगस्त। राजस्थान के टेक्सटाइल सेक्टर को सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) द्वारा 19 अगस्त 2026 को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला का विषय “Circularity in Textile Sector – Best Practices for Sustainability and New Technologies for Circular Economy” रखा गया है।

यह कार्यशाला 15 से 18 सितंबर 2026 तक गांधीनगर, गुजरात में आयोजित होने वाले 10वें वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF-2026) के प्री-इवेंट के रूप में आयोजित की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य टेक्सटाइल उद्योग में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD), अपशिष्ट प्रबंधन, जल के पुनः उपयोग और आधुनिक पर्यावरणीय तकनीकों के माध्यम से सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

छह तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञ साझा करेंगे आधुनिक तकनीकों की जानकारी

कार्यक्रम का उद्घाटन खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अपर्णा अरोरा द्वारा किया जाएगा। वहीं RSPCB के सदस्य सचिव श्री कपिल चन्द्रवाल स्वागत उद्बोधन देंगे।

कार्यशाला में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई के विषय विशेषज्ञों के साथ गुजरात के टेक्सटाइल विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और उद्योग प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में छह तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण पर्यावरणीय एवं तकनीकी विषयों पर चर्चा होगी।

इन सत्रों में रेडिएशन आधारित एफ्लुएंट डी-कलराइजेशन, अपशिष्ट जल उपचार की आधुनिक पद्धतियां, टेक्सटाइल केमिकल मैनेजमेंट, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक, SCADA आधारित एफ्लुएंट मॉनिटरिंग तथा राजस्थान टेक्सटाइल क्लस्टर के सतत विकास जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

उपचारित जल के पुनः उपयोग और भूजल दोहन कम करने पर जोर

RSPCB के सदस्य सचिव श्री कपिल चन्द्रवाल ने कहा कि राजस्थान का टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में औद्योगिक विकास को सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाना चाहिए, जिसमें अपशिष्ट को भी संसाधन के रूप में उपयोग किया जा सके और जल, ऊर्जा तथा कच्चे माल का अधिकतम दक्षता के साथ पुनः उपयोग हो।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में टेक्सटाइल उद्योगों में उपचारित जल का पुनः उपयोग बेहद जरूरी है। उद्योगों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के साथ-साथ जीरो ग्राउंड वाटर विथड्रॉल की दिशा में भी काम करना चाहिए। उपचारित सीवेज को औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग कर भूजल के दोहन को न्यूनतम अथवा शून्य करने के प्रयास किए जाने चाहिए।

WCEF-2026 में राजस्थान की उपलब्धियां होंगी प्रदर्शित

श्री कपिल चन्द्रवाल ने कहा कि WCEF-2026 भारत को वैश्विक मंच पर अपनी सर्कुलर इकोनॉमी आधारित नवाचारों और उपलब्धियों को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। राजस्थान भी औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को इस वैश्विक मंच पर प्रभावी रूप से प्रदर्शित करेगा।

कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, स्थानीय निकायों, उद्योग संघों, शोध संस्थानों और अकादमिक संस्थाओं के प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे। इनमें एलएसजी, रीको, पर्यावरण विभाग, जयपुर एवं जोधपुर विकास प्राधिकरण तथा नगरीय निकायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों के विचारों के आधार पर राजस्थान में सतत औद्योगिक विकास, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

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