चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े निर्धारित मानकों और कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसी क्रम में ART और सरोगेसी सेवाओं के नियमन में प्रथम दृष्टया उल्लंघन सामने आने पर यह कार्रवाई की गई है।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ के अनुसार, जयपुर संस्करण के एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित IVF, फर्टिलिटी और टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के विज्ञापन में भ्रूण को नीले रंग में प्रदर्शित किया गया था।
विभाग ने प्रथम दृष्टया इसे लिंग चयन से जुड़ी सेवा के प्रचार का संकेत माना। विभाग के अनुसार विज्ञापन में इस्तेमाल नीला रंग पुरुष बच्चे से संबंधित माना जा सकता है। इसी आधार पर संस्थान के खिलाफ ART (Regulation) Act, 2021 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ART कानून के तहत किसी भी प्रकार का सेक्स सिलेक्शन यानी लिंग चयन और सेक्स-सेलेक्टिव ART प्रक्रिया पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे कार्यों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रचार भी स्वीकार्य नहीं है।
नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल के जयपुर में 3 सेंटर, जबकि भीलवाड़ा, उदयपुर, कोटा, जोधपुर और अजमेर में एक-एक सेंटर के पंजीकरण निलंबित किए गए हैं।
निलंबित संस्थानों में भीलवाड़ा, कोटा, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर के एक-एक ART क्लिनिक लेवल-1/लेवल-2, जयपुर के दो ART क्लिनिक लेवल-2, जयपुर का सरोगेसी क्लिनिक और ART बैंक शामिल हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि राज्य में ART और सरोगेसी सेवाओं का संचालन निर्धारित कानून, नियमों और नैतिक मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। लिंग चयन जैसे प्रतिबंधित कार्यों के किसी भी प्रकार के प्रचार-प्रसार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार के अनुसार कार्रवाई का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा ART और सरोगेसी से जुड़े संस्थानों में कानूनी प्रावधानों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करना है।
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