RPSC के अधिकारियों की एक टीम ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया है। इसके बाद RPSC में भी बायोमेट्रिक्स, फेस रिकग्निशन और AI आधारित CCTV जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर तैयारी की जा रही है।
फेशियल ऑथेंटिकेशन के जरिए परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी की पहचान को उसके रिकॉर्ड से मिलाया जा सकेगा। इससे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर परीक्षा देने वाले डमी कैंडिडेट की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए AI युक्त CCTV कैमरे और लाइव सर्विलांस की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। इसके जरिए परीक्षा केंद्रों में होने वाली गतिविधियों पर निगरानी को मजबूत किया जाएगा।
RPSC अधिकारियों की ओर से इस पूरी व्यवस्था को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट करीब 4 से 5 दिन में मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजस्थान पुलिस की रिक्रूटमेंट विंग के अधिकारियों से भी चर्चा की जाएगी।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट और पहचान बदलकर परीक्षा देने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। राजस्थान SOG ने भी AI आधारित तकनीक के जरिए संदिग्ध डमी कैंडिडेट की पहचान करने की दिशा में काम किया है। मार्च 2026 में SOG ने करीब 2,000 संदिग्ध डमी कैंडिडेट की पहचान किए जाने की जानकारी दी थी।
RPSC की नई व्यवस्था लागू होने के बाद परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तकनीकी और सख्त होने की उम्मीद है।
RPSC का फेशियल ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में फर्जीवाड़ा, पहचान की अदला-बदली और डमी कैंडिडेट जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। आयोग का फोकस आगामी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर है।
विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि फेशियल ऑथेंटिकेशन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को किस स्तर पर और किन परीक्षाओं में लागू किया जाएगा।
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