राजस्थान के 11 और जिलों में कल से ऑनलाइन होगी उर्वरक बिक्री, किसानों को मिलेगा डिजिटल व्यवस्था का लाभ

जयपुर। राजस्थान में किसानों को सब्सिडी वाला उर्वरक समय पर और निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग डिजिटल व्यवस्था का विस्तार करने जा रहा है। गुरुवार से डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 को प्रदेश के 11 और जिलों में लागू किया जाएगा। इससे उर्वरक बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

नए चरण में बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक जिले शामिल हैं। इससे पहले दो चरणों में प्रदेश के 7 जिलों में यह डिजिटल व्यवस्था लागू की जा चुकी है।

एक लाख से अधिक किसानों ने की यूरिया की बुकिंग

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि पहले दो चरणों के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। अब तक एक लाख से अधिक किसानों ने करीब 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिजिटल बुकिंग की है। किसानों ने इस प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बताया है।

सरकार किसानों को एक बैग यूरिया 267 रुपए की निर्धारित दर पर उपलब्ध कराती है, जबकि प्रत्येक बैग पर करीब 1600 रुपए की सब्सिडी सरकार वहन करती है। विभाग के अनुसार सब्सिडी वाले यूरिया की कालाबाजारी और अनधिकृत उपयोग की आशंका को डिजिटल व्यवस्था के जरिए कम किया जा सकेगा।

फार्मर आईडी से होगी उर्वरक की बिक्री

नई व्यवस्था के तहत उर्वरक की बिक्री फार्मर आईडी के माध्यम से की जाएगी। राजस्थान में अब तक 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।

कृषि विभाग में जल्द ही एग्रीस्टैक कमिश्नरेट की स्थापना भी की जा रही है। इससे कृषि क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं और किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कालाबाजारी और टैगिंग पर लगेगी रोक

नई डिजिटल व्यवस्था में उर्वरक की प्रत्येक बिक्री ऑनलाइन दर्ज होगी। इससे वास्तविक मांग, उपलब्ध स्टॉक और वितरण की निगरानी आसान होगी। साथ ही निर्धारित दर से अधिक वसूली, जमाखोरी और अनधिकृत बिक्री पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा उर्वरक विक्रेता किसानों को उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए दुकानदारों और अधिकारियों को स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी मिल सकेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसान होगी प्रक्रिया

डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 को अधिक सरल, तेज और स्थिर बनाया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी किसानों को उर्वरक खरीदने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

कृषि विभाग ने उर्वरक कंपनियों, सहकारी समितियों और अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं से गो-लाइव के दौरान पूर्ण सहयोग करने का आग्रह किया है।

पूरे प्रदेश में चरणबद्ध विस्तार

कृषि विभाग के अनुसार डिजिटल उर्वरक वितरण व्यवस्था का उद्देश्य सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाना, कालाबाजारी पर रोक लगाना और किसानों को जरूरत के समय निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। 11 और जिलों में विस्तार के बाद इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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