चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जांच के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मरीजों की पर्चियां जूनियर रेजिडेंट या अन्य कर्मचारियों द्वारा तैयार की जा रही थीं। इन पर्चियों का संबंधित आरजीएचएस चिकित्सक द्वारा सत्यापन नहीं किया जा रहा था।
नए निर्देशों के तहत आरजीएचएस से जुड़े चिकित्सक को मरीज की पर्ची में लिखी जानकारी की खुद जांच और पुष्टि करनी होगी। इसके बाद डॉक्टर अपने हस्ताक्षर और मुहर लगाकर पर्ची को प्रमाणित करेंगे।
पर्ची तैयार करने, मरीज की जानकारी लिखने या डेटा एंट्री जैसे कामों में अस्पताल के नियमों के अनुसार अन्य कर्मचारियों की मदद ली जा सकती है। लेकिन मरीज की जांच, बीमारी की पहचान, दवाइयां, जांच और इलाज की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित डॉक्टर की ही होगी।
विभाग ने साफ किया है कि कोई भी दूसरा व्यक्ति डॉक्टर की ओर से पर्ची पर हस्ताक्षर या प्रमाणीकरण नहीं कर सकेगा।
अगर किसी पर्ची को संबंधित डॉक्टर ने खुद सत्यापित और प्रमाणित नहीं किया है, तो उसे आरजीएचएस क्लेम की जांच और भुगतान के समय नियमों के अनुसार मान्य नहीं माना जा सकता।
ऐसे मामलों में आरजीएचएस के नियमों और अस्पताल की संबद्धता की शर्तों के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है।
आरजीएचएस प्रशासन ने योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को नए निर्देशों का तुरंत और सख्ती से पालन करने को कहा है।
विभाग का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय और जवाबदेह बनाना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि आरजीएचएस के तहत जारी होने वाली हर पर्ची की जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की हो।
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