राकेश भाटी की पत्नी पाली नगर परिषद की निवर्तमान सभापति हैं। ऐसे में भाटी का भाजपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामना पाली के आगामी निकाय चुनाव में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
राकेश भाटी लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 30 साल से ज्यादा समय तक भाजपा में रहकर पाली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। पांच बार पार्षद रहने के अलावा वे पार्टी संगठन में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
ऐसे समय में जब पाली में नगर निगम चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, भाटी का कांग्रेस में जाना दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस इसे जहां अपनी चुनावी ताकत बढ़ने के तौर पर देख रही है, वहीं भाजपा के लिए यह स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति के लिहाज से चुनौती मानी जा रही है।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद राकेश भाटी ने भाजपा छोड़ने की वजहों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वे स्थानीय स्तर पर परेशान हो गए थे और करीब ढाई साल से काम नहीं हो रहे थे।
भाटी के मुताबिक प्रभारी मंत्री उनसे बातचीत नहीं करते थे और बैठकों को बंद कमरों तक सीमित रखा जाता था। उन्होंने कहा कि ऐसा अनुभव उन्हें पहले कभी नहीं हुआ।
हालांकि, राकेश भाटी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है।
राकेश भाटी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हुई कि क्या उन्हें मेयर पद को लेकर कोई आश्वासन मिला है। इस पर भाटी ने साफ कहा कि कांग्रेस में आने के लिए मेयर पद को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि वे अपनी इच्छा से कांग्रेस में आए हैं और उनका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा पार्षदों को जीत दिलाना है। मेयर का फैसला बाद में पार्षद करेंगे। उन्होंने पाली के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया।
पाली के नगर निगम बनने के बाद अब यहां पहली बार नगर निगम के चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में इस चुनाव का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
इसी चुनाव से ठीक पहले भाजपा के एक अनुभवी और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता का कांग्रेस में जाना कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राकेश भाटी के लंबे राजनीतिक अनुभव और स्थानीय संपर्कों का कांग्रेस को चुनाव में कितना फायदा मिलता है, यह परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद राकेश भाटी ने भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख पर भी गंभीर आरोप लगाए। भाटी ने आरोप लगाया कि पाली में भाजपा की स्थिति कमजोर हो चुकी है और कार्यकर्ता परेशान हैं।
उन्होंने दावा किया कि ज्ञानचंद पारख पार्टी के बजाय अपनी "प्राइवेट कंपनी" चला रहे हैं। ये आरोप राकेश भाटी ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद लगाए हैं; इन आरोपों पर संबंधित भाजपा नेता की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।
भाटी ने यह भी दावा किया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उन्हें पार्टी का दुपट्टा पहनाने और चुनाव में उतारने की बात कही थी, लेकिन पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने इस पर सहमति नहीं जताई।
राकेश भाटी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पाली में निकाय चुनाव को लेकर सियासी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं भाजपा के सामने पार्टी से जुड़े पुराने और प्रभावशाली नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती होगी।
खास बात यह है कि यह घटनाक्रम भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में हुआ है, इसलिए इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। अन्य मीडिया रिपोर्टों ने भी इसे निकाय चुनाव से पहले भाजपा के लिए महत्वपूर्ण झटके के तौर पर रिपोर्ट किया है।
अब चुनावी मैदान में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी सामने आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि राकेश भाटी के कांग्रेस में जाने का असर पाली के वार्ड स्तर के मुकाबलों पर कितना पड़ता है।
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