किर्गिस्तान में मोदी की कूटनीतिक चाल, ईरान-आर्मेनिया से बढ़ी नजदीकी ने ‘मक्का गैंग’ की बढ़ाई टेंशन

किर्गिस्तान में मोदी की कूटनीतिक रणनीति, ईरान-आर्मेनिया के साथ बढ़ी नजदीकी से बदले समीकरण

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा को भारत की मध्य एशिया और पश्चिम एशिया से जुड़ी कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बिश्केक में पीएम मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और आर्मेनियाके प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान के साथ अलग-अलग मुलाकात की। पहली नजर में ये बैठकें अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत लग सकती हैं, लेकिन इनके पीछे भारत के व्यापक रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं।

भारत ऐसे समय में इन देशों के साथ संपर्क बढ़ा रहा है, जब पश्चिम एशिया और आसपास के क्षेत्रों में नए राजनीतिक और सुरक्षा समीकरण बन रहे हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद क्षेत्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारत अपनी विदेश नीति के तहत अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

ईरान के साथ अहम बातचीत

पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात को खास महत्व दिया जा रहा है। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं हैं।

ईरान भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंच बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में तेहरान के साथ मजबूत संवाद भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक हितों के लिए अहम है।

आर्मेनिया के साथ सहयोग का विस्तार

आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। रक्षा, तकनीक, व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत और आर्मेनिया के रिश्ते लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

दक्षिण कॉकस में आर्मेनिया की स्थिति भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस क्षेत्र में भारत की मौजूदगी और संपर्क बढ़ना उसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बन सकता है।

किर्गिस्तान के साथ रिश्तों पर भी जोर

मेजबान देश किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। व्यापार, निवेश, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे इसमें महत्वपूर्ण रहे।

क्या है भारत की बड़ी रणनीति?

ईरान, आर्मेनिया और किर्गिस्तान के साथ एक ही यात्रा के दौरान हुई ये मुलाकातें संकेत देती हैं कि भारत पश्चिम एशिया से दक्षिण कॉकस और मध्य एशिया तक अपने रणनीतिक संपर्क मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हालांकि, इन बैठकों को सीधे किसी एक देश या समूह के खिलाफ जवाबी कदम बताना उचित नहीं होगा। भारत की रणनीति को ज्यादा व्यापक तौर पर देखा जा सकता है, जिसमें राष्ट्रीय हित, क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार, कनेक्टिविटी और स्वतंत्र विदेश नीति प्रमुख आधार हैं। बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भारत अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

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