प्रदेश की वित्त एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने इसे राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
UNESCO की Tentative List में शेखावाटी के 14 प्रमुख क्षेत्रों की ऐतिहासिक हवेलियों को शामिल किया गया है। इनमें:
अलसीसर
बिसाऊ
चिड़ावा
चूरू
डूंडलोद
फतेहपुर
झुंझुनू
खेतड़ी
लक्ष्मणगढ़
मंडावा
महांसर
नवलगढ़
रामगढ़
सीकर
शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसी हवेलियां मौजूद हैं, जिनकी दीवारों, छतों और आंतरिक हिस्सों पर बने बारीक और रंगीन भित्तिचित्र शेखावाटी की विशिष्ट कला और स्थापत्य शैली को दर्शाते हैं।
शेखावाटी की हवेलियों की चित्रकारी केवल सजावट तक सीमित नहीं है। इनमें धार्मिक प्रसंगों के साथ तत्कालीन सामाजिक जीवन, संस्कृति, व्यापार, परिवहन और रोजमर्रा की गतिविधियों को भी दर्शाया गया है।
कई हवेलियों में भगवान कृष्ण, रामायण और महाभारत से जुड़े प्रसंगों के साथ तत्कालीन राजघरानों और व्यापारियों के जीवन की झलक देखने को मिलती है। वहीं कुछ भित्तिचित्रों में उस दौर में भारत में पहुंची आधुनिक तकनीक और परिवहन के साधनों को भी कलाकारों ने अपनी कल्पना के जरिए उकेरा।
इसी वजह से शेखावाटी की हवेलियां उस दौर के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मानी जाती हैं।
शेखावाटी को लंबे समय से ‘ओपन आर्ट गैलरी’ के नाम से पहचान मिलती रही है। यहां कस्बों और शहरों की गलियों में एक के बाद एक भव्य हवेलियां नजर आती हैं। हवेलियों के बाहरी हिस्सों पर बने विशाल भित्तिचित्र पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं।
मंडावा, नवलगढ़, फतेहपुर, चूरू और झुंझुनू समेत कई इलाकों में आज भी शेखावाटी की इस अनूठी कला विरासत को देखा जा सकता है।
किसी धरोहर का UNESCO Tentative List में शामिल होना उसे UNESCO World Heritage Site का अंतिम दर्जा मिलना नहीं है। यह विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है।
इसके बाद धरोहर के संरक्षण, प्रबंधन, दस्तावेजीकरण और उसके Outstanding Universal Value को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
शेखावाटी की हवेलियों के Tentative List में शामिल होने से इनके संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके महत्व को सामने लाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत भी, विकास भी’ के संकल्प तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में राज्य सरकार राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
सरकार का जोर ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर भी है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
शेखावाटी की हवेलियां पहले से ही देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। UNESCO की Tentative List में शामिल होने के बाद इस क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।
इससे विरासत पर्यटन, होटल, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और स्थानीय खान-पान से जुड़े कारोबार को फायदा मिल सकता है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटन और संस्कृति से जुड़े रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
वैश्विक पहचान मिलने के साथ ही शेखावाटी की हवेलियों के संरक्षण की चुनौती भी महत्वपूर्ण है। समय के साथ कई पुरानी हवेलियां जर्जर हो रही हैं और उनकी भित्तिचित्र कला मौसम, रखरखाव की कमी और अन्य कारणों से प्रभावित हो रही है।
ऐसे में इन ऐतिहासिक इमारतों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, दस्तावेजीकरण और मूल स्वरूप को बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
अब UNESCO की Tentative List में शामिल होने के बाद उम्मीद है कि शेखावाटी की हवेलियों के संरक्षण और प्रबंधन को नई गति मिलेगी। भविष्य में यदि इन्हें UNESCO World Heritage List में स्थान मिलता है, तो यह शेखावाटी के साथ-साथ पूरे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी वैश्विक उपलब्धि होगी।
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