पार्ट - 2 : जयपुर के “द ग्रेंड वॉक” में बड़ा खुलासा ऊपर की 5 मंजिलें भी अवैध निर्माण के दायरे में! Boss Hyper Lounge पर JDA की कार्रवाई अधूरी! बिना Fire NOC और स्वीकृत मानचित्र के चल रहा संचालन

 जयपुर | टोंक रोड स्थित लक्ष्मी मंदिर के पास बनी चर्चित व्यावसायिक इमारत “द ग्रेंड वॉक” एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। अब तक केवल इसकी छत पर संचालित “बॉस हाइपर लांज” को लेकर चर्चा हो रही थी, लेकिन जांच में सामने आया है कि इस इमारत की ऊपरी पांच मंजिलों का निर्माण भी कथित रूप से बिना विधिवत स्वीकृति के किया गया है।

जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा अप्रैल में रूफटॉप रेस्टोरेंट पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन मामला अब केवल एक रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं रहा। दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल में कई गंभीर तकनीकी और कानूनी सवाल सामने आए हैं।

क्या है पूरा मामला?

टोंक रोड स्थित ग्राम रामपुरारूपा के खसरा नंबर 307 पर करीब 6600 वर्गगज भूमि पर “द ग्रेंड वॉक” नाम से नौ मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया गया।

JDA रिकॉर्ड के अनुसार 25 फरवरी 2016 को केवल दो बेसमेंट,लोअर ग्राउंड,अपर ग्राउंड और ऊपर की दो मंजिलों के लिए भवन मानचित्र स्वीकृत किया गया था। बाद में बिल्डर फर्म SDC (Sand Dune Constructions) ने इस परियोजना को 23 अगस्त 2017 को RERA में रजिस्टर कराया। इसके बाद 4 सितंबर 2018 को JDA भवन मानचित्र समिति ने संशोधित प्रस्ताव पर विचार किया और चार मंजिलों की जगह नौ मंजिला निर्माण की सैद्धांतिक मंजूरी दी। इस मंजूरी के तहत लगभग 6819.68 वर्गमीटर अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र स्वीकृत किया गया और इसके बदले बिल्डर फर्म पर करीब 8.36 करोड़ रुपए की बेटरमेंट लेवी और अन्य शुल्क लगाए गए।

 

चेक बाउंस हुआ और रद्द हो गई मंजूरी

सूत्रों के अनुसार: बिल्डर फर्म ने राशि जमा कराने के लिए पोस्ट डेटेड चेक दिए। पहली किश्त जमा हो गई, लेकिन दूसरी किश्त का चेक बाउंस हो गया। इसके बाद JDA ने अतिरिक्त निर्माण की पूर्व स्वीकृति को निरस्त कर दिया। यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ।

 

बिना स्वीकृत नक्शे के बन गई पांच मंजिलें?

इसके बाद 14 जून 2019 को बिल्डर फर्म ने पांचवीं से नौवीं मंजिल तक के अनुमोदन के लिए दोबारा आवेदन किया। फिर 1 फरवरी 2021 को भवन मानचित्र समिति की बैठक हुई। मौके पर बिना स्वीकृति पांचवीं मंजिल निर्मित और छठी मंजिल निर्माणाधीन पाई गई। JDA ने जुर्माना, ब्याज और अन्य शुल्क सहित लगभग 7.28 करोड़ रुपए का मांग पत्र जारी किया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब तक इन पांच मंजिलों के विधिवत अनुमोदित नक्शे जारी ही नहीं किए गए। इसके बावजूद मौके पर पूरा निर्माण खड़ा हो गया। भवन नियमों के अनुसार बिना अनुमोदित मानचित्र के किया गया निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है।


 

एयरपोर्ट अथॉरिटी की NOC भी लंबित

सूत्रों के अनुसार बिल्डर फर्म ने जनवरी 2026 में दोबारा JDA को नक्शा अनुमोदन जारी करने के लिए पत्र लिखा था। जवाब में JDA ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की NOC मांगी। जानकारों का कहना है कि: AAI की अनुमति के बिना ऊंचाई संबंधी अंतिम स्वीकृति और संशोधित भवन मानचित्र जारी नहीं किए जा सकते।

 

“बॉस हाइपर लांज” पर कार्रवाई अधूरी क्यों?

इसी इमारत की छत पर संचालित “Boss Hyper Lounge” पर JDA ने 8 अप्रैल 2026 को ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू की थी। लेकिन मामला अदालत और अधिकरण तक पहुंच गया।

घटनाक्रम इस प्रकार रहा:

  • JDA ने अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई शुरू की।
  • बिल्डर फर्म JDA अपीलीय अधिकरण पहुंच गई।
  • 13 अप्रैल को अधिकरण ने अंतरिम रोक लगा दी।
  • अधिकरण ने बिल्डर फर्म को 15 दिन में जवाब प्रस्तुत करने को कहा।
  • जवाब मिलने के बाद JDA ने 8 मई को विधिक नोटिस जारी किया।
  • फिर मामला दोबारा अधिकरण पहुंच गया।
  • अधिकरण ने 21 मई तक नोटिस की क्रियान्विति पर रोक लगा दी।

 

सबसे बड़ा खुलासा — फायर NOC नहीं!

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि  रेस्टोरेंट संचालकों ने स्वयं अधिकरण में यह स्वीकार किया कि उनके पास फायर विभाग की NOC उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा रूफटॉप रेस्टोरेंट का मानचित्र भी स्वीकृत नहीं है। इसके बावजूद रेस्टोरेंट संचालन जारी है,बार और क्लब गतिविधियां चल रही हैं,

और बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं।

 

क्या “स्टे” का मतलब संचालन की अनुमति है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार “स्टे” या अंतरिम राहत केवल तत्काल ध्वस्तीकरण या कठोर कार्रवाई पर अस्थायी रोक होती है।
यह निर्माण या संचालन को वैध घोषित नहीं करती।ऐसे में यदि फायर NOC नहीं है, भवन उपयोग अनुमति स्पष्ट नहीं है,और स्वीकृत नक्शा मौजूद नहीं है,तो संबंधित विभाग अलग से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहते हैं।


और भी गंभीर आरोप

शिकायतों में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि इमारत में जहां सिनेमाघर प्रस्तावित था वहां कार्यालय बना दिए गए। बेसमेंट में 32 दुकानों की जगह 64 दुकानें बना दी गईं। इस संबंध में JDA ने 6 जुलाई 2024 को नोटिस भी जारी किया था।

 

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

इस पूरे मामले ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं:

  • क्या बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमों से ऊपर माना जा रहा है?
  • बिना फायर NOC और स्वीकृत नक्शे के संचालन कैसे जारी है?
  • JDA की कार्रवाई केवल नोटिस और स्टे तक सीमित क्यों दिखाई दे रही है?
  • क्या आम आदमी और प्रभावशाली बिल्डर्स के लिए अलग-अलग नियम हैं?

 

अब निगाहें JDA और प्रशासन पर

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि JDA,फायर विभाग,और अन्य संबंधित एजेंसियां इस मामले में अंतिम रूप से क्या कदम उठाती हैं। क्या अवैध निर्माण और संचालन पर सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला केवल नोटिस, अपील और स्टे तक ही सीमित रह जाएगा?

पार्ट - 2 : जयपुर के “द ग्रेंड वॉक” में बड़ा खुलासा ऊपर की 5 मंजिलें भी अवैध निर्माण के दायरे में! Boss Hyper Lounge पर JDA की कार्रवाई अधूरी! बिना Fire NOC और स्वीकृत मानचित्र के चल रहा संचालन

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
JDA के नोटिस के बावजूद चल रहा “Boss Cafe” का रूफटॉप रेस्टोरेंट, स्टे की आड़ में नियमों को चुनौती? | जेडीए की नाक के नीचे सरकारी जमीन पर फिर कब्जा, बुलडोजर चला… लेकिन अवैध कॉलोनी फिर खड़ी हो गई! | राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 'आटा-साटा' प्रथा को बताया कानूनी व नैतिक रूप से दिवालिया, कहा- 'बेटी किसी सौदे की कीमत नहीं' | जेडीए की नाक के नीचे सरकारी जमीन पर फिर कब्जा, बुलडोजर चला… लेकिन अवैध कॉलोनी फिर खड़ी हो गई! | महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: CM का विपक्ष पर बड़ा हमला, डोटासरा बोले- “दिल्ली की पर्ची पढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री!” | राम मंदिर में आज रचा जाएगा इतिहास! राष्ट्रपति करेंगी ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, 7000 मेहमान बनेंगे गवाह | गैस संकट पर सरकार की बड़ी सफाई: घबराहट में बढ़ी सिलेंडर बुकिंग, रोज 50 लाख डिलीवरी; पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी नहीं | भजनलाल शर्मा का आया एक फोन और सारा काम हो गया... | मुकेश मिश्रा बने इंडियन मीडिया काउंसिल के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष, रतीराम गुर्जर को मिली प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी | उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग विवाद: TMC बोली BJP ने विपक्षी सांसदों को ₹15-20 करोड़ में खरीदा; भाजपा ने कहा – I.N.D.I.A. गठबंधन में फूट |