रात करीब एक बजे शुरू हुई इस समस्या के चलते मुख्य इमरजेंसी हॉल के पास स्थित ईसीजी रूम, मुख्य कॉरिडोर और माइनर OT में पानी फैल गया। पानी डक्टिंग के जरिए अंदर पहुंचने से कई जगह फॉल सीलिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई। माइनर OT और प्लास्टर रूम के कॉरिडोर में फॉल सीलिंग का हिस्सा गिर गया। राहत की बात यह रही कि जिस स्थान पर सीलिंग गिरी, वहां उस समय मरीजों या स्टाफ की आवाजाही नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
घटना की सूचना मिलते ही ट्रॉमा सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. राजेन्द्र मांडिया, उपअधीक्षक डॉ. जगदीश मोदी सहित अस्पताल प्रशासन मौके पर पहुंचा और पानी निकासी तथा व्यवस्थाएं बहाल करने का कार्य शुरू कराया। प्रशासन ने प्रारंभिक जांच में पुराने ड्रेनेज पाइप के फटने को घटना का कारण बताया और इसकी जिम्मेदारी PWD विंग के रखरखाव पर डालते हुए पाइप की तत्काल मरम्मत और सफाई के निर्देश दिए।
हालांकि हालात पर जल्द नियंत्रण पा लिया गया, लेकिन यह घटना अस्पताल की मानसून तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मुख्य इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जलभराव और गंदगी से संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मानसून की शुरुआत में ही सामने आई इस अव्यवस्था ने साफ कर दिया कि यदि समय रहते स्थायी सुधार नहीं किए गए, तो आगामी बारिशों के दौरान मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था दोनों पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
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